मेरी जैविक माँ ग्यारसी देवी, दत्तक माँ भूरी देवी, पिता भैरूराम जी एवं दत्तक पिता भूराराम जी को समर्पित जिन्होंने मुझे जीवन के हर पहलू पर बहुत स्नेहपूर्वक महत्वपूर्ण शिक्षा दी थी ।


आप सबको प्रणाम एवं हृदय से आभार। मेरे साधारण जीवन का निष्कर्ष यह है एवं आप लोगों से अर्ज है कि आप अपना जीवन बेहतर बनाने की कोशिश करें । मुझे पूरा विश्वास है कि आप ऐसा कर सकते हैं और आपके इस कार्य में मेरी यह कुछ साधारण सी कविताएं शायद आपको मदद कर सकती है ।

हर कार्य में, चाहे कितना ही छोटा हो हमें बहुत लोगों की मदद व आशीर्वाद की जरूरत पड़ती है । यह मेरा सौभाग्य है कि मेरे साथ मेरे बहुत से समर्थक व हौसला बढ़ाने वाले महानुभाव जुड़े हुए हैं । ये कविताएं बहुत ही सरल और सीधी-सादी है परन्तु इनको लिखने में, मैं एक तरह का युद्ध देख रहा था जो मेरी कलम और सफेद पेपर के बीच मचा हुआ था। इस संग्राम में हमेशा की तरह, मेरे छोटे भाई श्री रामनिवास मेहता, आई .ए. एस. का बहुत योगदान रहा क्योंकि वे हिंदी के ज्ञाता होने के साथ-साथ जीवन और दुनिया के हर पहलू की अच्छी पकड़ रखते हैं । रही मेरी बात तो मैं बेधड़क यह स्वीकार करता हूँ कि मुझे हिंदी का कोई खास ज्ञान नहीं है । मेरे अन्य मार्गदर्शक श्री बजरंग लाल जी शर्मा, आर.ए.एस. जो मेरे अनुज रामनिवास जी के भी गुरु रहे हैं , उन्होंने बहुत सी कविताओं का मूल्यांकन किया एवं सटीक सुझाव दिए । बजरंग जी जैसे गुरु आज के ज़माने में मिलना बहुत मुश्किल है। सेवानिवृत प्रधानाध्यापक एवं संस्कृत व हिंदी की प्रखंड ज्ञाता / (जानकारी रखने वाली) श्रीमती रमा शर्मा, पत्नी स्वर्गीय श्री सुरेश चंद्र शर्मा जो सौभाग्यवश मेरे पडोसी मित्र श्री प्रद्युम्न शर्मा की माताजी है, इन्होने भी मेरी कविताओं में कुछ निखार ला दिया है। इन कविताओं में कुछ अच्छे शब्द आपको पढ़ने को मिलेंगे जो सबके सब श्रीमती रमा शर्मा की ही देन है। इनका मैं तहे दिल से आभारी हूँ। मैं, मेरे दूसरे छोटे भाई कर्नल (डॉक्टर) चंद्रशेखर मेहता का भी हृदय से आभार व्यक्त करना चाहता हूँ जिन्होंने मेरी इन कविताओं का समय-समय पर अवलोकन किया, पुस्तक का आवरण बनाया एवं इसके प्रकाशन में मदद की।

आपको शायद अजीब लगे लेकिन मैं एक बात जरूर कहना चाहूंगा की वर्तमान में जो हमें मोबाइल में सुविधा है वह बहुत सार्थक साबित हुई है। मैं बोलता हूँ और मोबाइल लिख देता है, कई बार ताज्जुब हुआ कि मैं आधा बोलकर जो शब्द सोच रहा था वह मोबाइल मुझे दिखा देता था। पता नहीं इसके लिए मैं किसको धन्यवाद् दूँ पर यह तथ्य सही है। आप हँसियेगा मत मेरी इस बात पर। अंत में, मैं आपका बहुत आभारी हूँ की आप अपना समय देकर यह पढ़ रहे हैं।

बहुत बहुत धन्यवाद।

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