हम लड़ते हैं जीवन के हर मोड़ पर कई तरह के युद्ध,
अतिश्योक्ति नहीं, शायद जीवन का दूसरा नाम है संग्राम
लड़ते हैं हम खुद से भी, कई बार अपनों से होता है महायुद्ध
सभी झेलते हैं गृह युद्ध और वाकयुद्ध।
शीत युद्ध ने भी बदल लिया है अपना रंग-ढंग,
महा शक्तियों के तीव्र मतभेद व सहयोग से पनपता है यह
समझना होगा इसको, वरना कर सकता है किसी को भी अपंग।
हैं इसके अनगिनत कारण व कई स्वरुप,
हर युग में यह लेता आया है नए-नए रूप ।
जमाना है साइबर हमले, आर्थिक प्रतिबन्ध, गलत खबरें व छदम युद्ध का।
डर सता रहा है जैविक, रासायनिक व परमाणु युद्ध का ।
क्या होना चाहिए व क्या होता है इसमें फर्क हमेशा रहेगा ?
शैतानी प्रवृति वाला किसी को भी आराम से नहीं जीने देगा ।
युद्ध है विस्फोट भटके हुए इंसानों की बेचैनी का,
इनके दिलों – दिमाग में चलता रहता है हरदम घमासान
क्रोध, ईर्ष्या, घृणा व नाजायज असीमित इच्छाओं का
दृष्टान्त याद है गीता, महाभारत व विश्व युद्धों का।
नेक सोच, भाईचारा व सम्मान धारणाएं मानव में ना थी ना रहेगी,
परिणामस्वरूप कई विपदाएं आयी थी व आगे भी आयेंगी।
ताकतवर कमजोर को व धनी गरीब को अक्सर सताता है,
वादे, विश्वास व भरोसा टूटेगा और टूटता आया है।
भूल मत करना सिरफिरों की कमी ना थी ना होगी,
इन लोगों की मूर्खता को कभी भी कम करके मत आंकना
इनके हाथों में कमान आते ही लड़ाइयां तो जरूर होंगी।
मत करना यकीन किसी पर, अपने हथियार पास में रखना,
थोड़ी भी चूक हुई तो जरूर पड़ेगा पछताना।
युद्ध के परिणाम हम सब ने देखे हैं
महिलाओं, बेसहारों, बच्चों, बेकसूरों व वृद्धजनों पर पड़ती है मार,
शादी की मेहंदी, मांग का सिन्दूर धो डालती हैं अश्रुओं की बौछार
राख हो जाता है सब कुछ, चारों तरफ होती है लाशों की कतार
उम्र भर की शान-शौकत व कमाई हो जाती है क्षणभर में बेकार
करने लगता है धरती का हर कण करुणा की पुकार।
थम जाती है हर तरह की प्रगति,
फैल जाती है चारों और दुर्गति की दुर्गति।
हर ख़ुशी पर ख़ामोशी बिछा देती है मौतें,
बिलखती है देवियां बनकर विधवा औरतें।
ये तो कुछ झलकियाँ है युद्ध की विभीषिका की,
धूमिल ना हो आपकी याददाश्त, कोशिश है याद दिलाने की।
आज हम बारूद के ढ़ेर पर बैठे हैं,
नहीं बचेंगे वे भी जो युद्ध से नफा कमाते हैं
अमर नहीं रहेंगे जो बम और मेक 5-10 की मिसाइल बनाते हैं
संग्रामों की तबाही व कारण बताना आसान है,
इन्हे रोकने के उपाय और अंजाम बताना मुश्किल है
अंजाम – “केवल मृत लोगों ने युद्ध का अंत देखा है” (1)
लियो टॉलस्टॉय की पुस्तक = “द किंगडम ऑफ़ गॉड” (2) पढ़ना
इसमें युद्ध का विस्तृत विवरण और रोकने का लेखा-जोखा है ।
नेक मानवों की कोशिश रही है, खलनायकों को सुधारने की,
मनुष्यता की गलत परिणीति से दुखी होती है आत्मा उनकी।
बेबस हूँ, कुछ और सुझाव नहीं है मेरे पास,
एक बात जरूर है, मैंने छोड़ी नहीं है आस
छोटे-मोटे युद्ध रुकवा देता हूँ, जो होते हैं मेरे आस-पास ।
सन्दर्भ
1. Only the dead have seen the end of war – Plato
प्लेटो यूनान के प्रसिद्ध दार्शनिक थे। वे सुकरात (Socrates) के शिष्य व अरस्तु (Aristotle) के गुरु थे।
2. The Kingdom of God is within you by Leo Tolstoy , Chapter VI, Attitude of men present day of war – 1893
ले. जनरल (डॉ.) शिवराम मेहता (रिटायर्ड)
Phone: +91 9413286502, +91 9571286502
Email: mehtashivram29@gmail.com
Leave a Reply