नहीं रहते हरदम स्वर्णिम पल, आन-बान व शान,
सुन्दर कल के पल, प्यारे परिजनों की यादें करेगी परेशान।
जिन्होंने थामा था हर विपदा में तुम्हारा हाथ,
दिया था असीम, अशर्त प्यार, झेले सारे सुख – दुःख साथ-साथ।
मुश्किल होता हैं ऐसे प्रियतम को भूलना
पर स्मरण रहे, वो घड़ियाँ वापस नहीं आएँगी
जो बितायी थी आपने उनके साथ।
उनका उद्देश्य होता था तुम्हे देना अपार आत्मिक सुख,
तो क्या अब उनकी आत्मा, देना चाहेगी तुम्हे कोई दुःख।
मत करो जुल्म उन आत्माओं पर अब बेचैन रहकर,
सोचों, क्या वह रूह नहीं होगी दुखी, तुम्हे तड़पता देखकर।
बेचैन हो जायेगी वो आत्माएं भी,
तुम्हारे अनमोल मोटे-मोटे आंसुओं पर।
उनकी यादों, अनुभवों से बनाओ वर्तमान को सुन्दरतम,
सुखी सिर्फ वही नर जो बना लेता हर हालत को अति-उत्तम।
कृतज्ञ रहो धन्यवाद दो की आप खुश थे उनके साथ,
श्रेष्ठ मानव तो सीख लेते हैं संतुष्ट रहना,
अगर हो भी जाए अनाथ।
स्मरण रहे नहीं लौटेंगे पुराने पल मलान रहने से,
बिगड़ जाएगा वर्तमान, बेकार के रोने-धोने से,
पुरानी विफलताओं व तोहिनों को निकाल फेंकना मन मस्तिष्क से
सीख जरूर ले लेना इन सब कड़वी यादों से
बर्बाद ना हो अमृतमय वर्तमान बीते कड़वाहट के विष से।
सफल जीवन का सिर्फ एक मंत्र,
सीखलो हर हालत में रहना सुखी व स्वतंत्र
मन की कल्पना, आशा, हर चाह को बनाओ आनंदमय सात्विक भाव से,
बढ़ो आगे उत्साहित होकर खुश मिज़ाज़ से
हर कष्ट से निजात पाओगे सिर्फ इसी तरकीब से।
ले. जनरल (डॉ.) शिवराम मेहता (रिटायर्ड)
Rajani Sethi
Bahut Sundar seekh….aaaj main jeene ki tarkeeb..Bina kisi shikayat aur shikvey ke….har haal main santusht aur kriragya …aabhar
Lt col Dhanalakshmi
Superb nd a simple message but conveying so much to be read by all 🙏🏻
Jaswant Singh
Excellent sir, my compliments.