बिरले पहुँचते इस अवस्था में, खुशियाँ मनाना बेशुमार,

तैयारी करनी है बचपन से ही, ताकि झेलनी ना पड़े आम बिमारियों की मार।

सदा बचना मोटापा, नशा-पत्ता, आलस्य व गलत सोच से,

सही खान-पान, वर्जिश जरूर सुधारेगी बुढ़ापा

कुछ व्याधियाँ फिर भी आयेंगी, झेलना इन्हे अपनी सकारात्मक सोच से।

सही रखना दिनचर्या, मत भूलना घूमना, ध्यान व योग को,

यही रखेगी तंदुरुस्त कमजोर होती यादाश्त व मांसपेशियों को।

चिकित्सकों की सलाह व नियमित जांच में ना हो ढिलाई,

छुपाना मत अगर सताये मानसिक परेशानियाँ

खुलकर बात करना अपनों से बहुत है इनकी भी कारगर दवाई।

अगर हो कुछ माया तो जरूर रखना अपने पास,

ताकि हाथ न फैलाना पड़े, लेकर झूठी आस।

सहन करना सीखना अगर घोर अपमान करें अपने भी,

चुप-चाप पीना अपने आंसू, मत दिखाना अपने घाव दूसरों को कभी।

अगर रहोगे प्रफुल्लित मन से अधिक अधिकतर मौन,

फिर दु:खी कर सकता है आपको कौन ?

गाने बजाने का शौक रखना यह रखेगा खुश हर हाल में,

याद रखना, कोई नहीं जुड़ना चाहता दु:खी इंसान के साथ में।

अति सुन्दर है प्रकृति व दुनिया, सीखना आनंद लेना इनका,

रखना दिनचर्या नियमित, लुत्फ़ उठाना ईश की आराधना का।

तृप्त रहना, खुश रहना सिर्फ है तुम्हारे हाथ में,

संताप मत करना अगर कोई ना जुड़े आपके साथ में।

जुड़े रहना पुराने यार दोस्तों से पर फ़ोन करना उनकी सहूलियत के हिसाब से,

व्यस्त परिजनों का समय बर्बाद न करना व्यर्थ की लम्बी चौड़ी वार्तालाप से।

छूटेगा प्रियजनों का साथ, कई करेंगे झूठी प्रीत,

याद रखना अक्सर चलती है दुनिया में यही रीत

हाँ, अभी भी कुछ हैं महान मानव जो बने रहते बुजुर्गों के मीत।

धीरज, कम बोलने, हस्तक्षेप न करने से जरूर सुधरता बुढ़ापा,

ध्यान रहे, कुछ भी हो, ना खोना अपना आपा।

वसीयत जरूर बनाना जब हो साठ के आस-पास,

ताकि झगड़ा-फसाद ना हो उत्तराधिकारियों में लेकर झूठी आस।

उतावलापन है हर सुख शान्ति का दुश्मन,

होती इससे अनाप-शनाप गलतियां

इसको नहीं त्यागोगे तो कभी खुश नहीं रहेगा तन-मन।

अब क्या जल्दी, आपने तो सब कुछ कर लिया देख,

समय बिताओ प्यार से, करते रहो औरों की व खुद की सही देख-रेख।

ले. जनरल (डॉ.) शिवराम मेहता (रिटायर्ड)