भूल कर भी ना बनना कभी अभिमानी,
घमंडी अक्सर गिर जाते हैं शिखर पर पहुंचने से पहले
विनम्रता ही है सफलता की कुंजी व असली निशानी ।
अगर आप विनम्र हैं तो अवश्य हैं महानता के बहुत करीब,
अच्छे लोगों का जमावड़ा रहता है सुशील लोगों के चारों तरफ
सुख शांति से जीता है विनयशील चाहे हो वह गरीब
विनम्रता की धरोहर से ही उज्ज्वल होगा हमारा नसीब ।
अक्खड़ लोगों से तो अपने ही बना लेते हैं दूरी,
उनसे तो वही जुड़ते हैं जिनकी होती है कोई मजबूरी ।
कैसे भी हो हालात, हमें अपनाये रखनी होगी विनयशीलता,
उद्दंड व अशिष्ट लोगों को तो अंत में अवश्य मिलती है विफलता ।
लेखक – लेफ्टिनेंट जनरल (डॉक्टर) शिवराम मेहता, सेवानिवृत
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