“सफलता प्राप्त करने के लिए कठिन परिश्रम करो और ढृढ़ इच्छा रखो तुम अपने लक्ष्य को पाने में निश्चित सफल होंगे।” — स्वामी विवेकानंद
है विद्यार्थी जीवन अनमोल शुरू के पच्चीस वर्षों में
यह ब्रह्मचर्य आश्रम ही है सफल जीवन का आधार
समय का एक क्षण भी बेकार ना हो इस दौरान में
सफल वो ही होते हैं जो बने रहते हैं विद्यार्थी ताउम्र
थोड़ी सी लापरवाही से हो जाते हैं सितारे गर्दिश में
कहीं भी कमी मत छोड़ना अपनी जिम्मेदारियां निभाने में
चाहे हो उपलब्ध समर्पित माँ-बाप व श्रेष्ठ विद्यालय
सफलता आसान नहीं होगी अगर चुके मेहनत करने में।
शिक्षकों, माता-पिता, व दादा-दादी का कहना मानना
कड़ी मेहनत से कर लेना अपने भाग्य का निर्माण
मोबाइल का उपयोग हर हाल में सीमित रखना
अनावश्यक सजने-धजने में समय बर्बाद ना हो
रहना व्यवस्थित व हर पल का सदुपयोग करना
जरूर बनाना जीवन के हर क्षण को उपयोगी
यही है खास शिक्षा जिससे नहीं पड़ेगा पछताना।
नियंत्रण करना मन के उलूल-जुलूल विचारों को
अनियंत्रित मन जरूर फंसाता है उलटे सीधे कामों में
मन की शिक्षा नहीं बर्बाद होने देगी आपके समय को।
उच्च लक्ष्य व ढृढ़ निश्चय से आगे बढ़ते रहना
खेलकूद, मनोरंजन व ध्यान के लिए भी समय रखना
मत होना निराश असफलताओं व मुसीबतों के डर से
जीत-हार सदैव चलती रहती है हर मानव के जीवन में
सीख जरूर लेना असफलताओं व कठिन हालातों से
कोशिश सदैव जारी रखना कुछ कर गुजर जाने की
सही मंजिल व राह मिलती है चट्टानों को तोड़ने से
याद रखना मानव अपनी तकदीर खुद लिखता है
कड़ी मेहनत, सही चरित्र व सत्कर्मों से।
सफलता व ख़ुशी केवल चरित्रवानो को ही मिलती है
चरित्रहीन अंततः गिरते हैं गहरी खाइयों में
जिनसे उबरना बेहद मुश्किल होता है।
गर गलती हो जाए तो तुरंत सही राह पकड़ना,
अवश्य पहुंचोगे शिखर पर, कोई नहीं रोक पायेगा आपको
यही एक तरकीब है जिससे कभी नहीं पड़ेगा पछताना।
ले. जनरल (डॉ.) शिवराम मेहता (रिटायर्ड)
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