(दिखावे और खर्चीले समारोहों से बचें )
उत्सव जरूरी है शुभ अवसरों, त्योंहारों व उपलब्धियां पर,
अच्छे मौके कहां आते हैं बार-बार,उनकी यादें जरूर देगी सुकून
रखना जीवन का हर क्षण उत्साह व जश्नों की धमाल से भरपूर देख-दिखावे के चक्कर में मत आना भूलकर भी
हैसियत से ज्यादा खर्च मत करना किसी भी अवसर पर
कहीं ऐसा ना हो, आप कर्ज के बोज के नीचे दब जाओ उम्र भर
जरूरी होता है कुछ अर्थ बचाकर रखना आगे के लिए
जरूरत पड़ती रहती है धन की कई अन्य आवश्यकताओं पर ।
मत आना रिश्तेदारों व दुनिया के बहकावे में,
होड़ और झूठी प्रतिष्ठा के दबाव में खजाना खाली ना हो जाए
कोई नहीं मदद करेगा जब आप होंगे मजबूर हालत में
मत आना पाखंडियों और गलत पंडितों के चक्कर में
यह कर देंगे आपका खजाना खाली फ़िज़ूल खर्ची में ।
कुछ खर्चे व उत्सव होते हैं जरूरी,
परिजनों व घरवालों के मान-सम्मान में खर्च की कमी ना हो
इसमें अगर की कंजूसी तो जिंदगी जरूर लगेगी अधूरी ।
बहुत सुकून मिलेगा अगर थोड़ा खर्च करोगे गरीबों की सेवा में,
यही है तरकीब जिससे रह सकोगे सदैव आनंद की स्थिति में ।
Never spend more than your means on any occasion.
लेखक – लेफ्टिनेंट जनरल (डॉक्टर) शिवराम मेहता, सेवानिवृत
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