(सही लोगों से चर्चा करके सुधारना हालात को)

छोटी-मोटी चिंता है स्वाभाविक उठती है हर मन में,

ध्यान रहे यह घोंसला न बना ले आपके मस्तिष्क में।

थोड़ा क्षणिक फिक्र कई बार हो सकता है फायदेमंद,

इससे सुधार लेते हैं अपने कई कार्य अकलमंद।

तनाव होता है परिस्थिति और मन:स्थिति के तालमेल की कमी से,

हम बदल नहीं सकते कई परिस्थितियों को,

यह तो उत्पन्न होती है अनेक कारणों से,

शायद कर्मों के अधीन होते हैं कई हालात,

मानव बच नहीं सकता हानि, दुःख, वियोग व मरण के थपेड़ों से।

मन:स्थिति की लगाम ही होती है हमारे हाथों में,

सकारात्मक व आशावादी रहने से सुधरेगी हर स्थिति,

फायदा होगा, कठिन परिस्थिति में भी प्रसन्नचित्त रहने में।

अतीत के दुखों को मत करना बार-बार याद,

ये आपको धकेलेंगे नकारात्मकता की ओर,

इससे होगा आपका वर्तमान व पूरा शरीर बर्बाद।

कामचोरी, बेईमानी, बिना मांगे राय देना, दुष्कर्म, झूठ, पाखण्ड,

ईर्ष्या, कुढ़न, अत्यधिक बोलना, कटुशब्द, पश्चाताप, घमंड।

लोक प्रतिष्ठा की लालसा, मदद न करना, स्वार्थी बने रहना,

गलत लोगों का साथ, जरुरत से ज्यादा खर्च, दिखावा,

गलती करने पर क्षमा न माँगना व न औरों को क्षमा करना,

यह सब जरूर देंगे तनाव, इनसे बचना,

सत्कर्म करते रहना, परमपिता पर भरोसा अवश्य रखना,

तनाव कम होगा, जब सीख लेंगे महत्वपूर्ण कार्यों में व्यस्त रहना।

अत्यधिक तनाव होता है अवसाद जैसी बीमारियों से,

वर्तमान में है यह आम, हैं इसके अनेक कारण,

हाँ, अवसाद है कम खतरनाक मधुमेह, उच्च रक्तचाप व दिल के दौरों से,

इसे छुपाना वह घबराना होता है बेहद पीड़ादायक,

तुरंत बताएं अपनों को व सलाह ले चिकित्सकों से,

ध्यान, मनोचिकित्सा, व दवा है इसके शत प्रतिशत कारगर उपाय,

काम जरूर बिगड़ेगा अवसाद को नकारते रहने से।

देरी ना हो सलाह लेने में व ना शर्माना, इसमें कतई नहीं होता अपमान,

टालम-टोल से जरूर चूर हो जायेगा आपका झूठा अभिमान।

ले. जनरल (डॉ.) शिवराम मेहता (रिटायर्ड)