छुये मेरे हाथ हरदम ईश के पावन चरणों को,
झुके मेरा शीश सदैव माता-पिता, गुरुजन व बुजुर्गों के लिए
करुणामय स्पर्श से मिलती है सांत्वना दुखी दिलों को
माँ का स्पर्श देता है जीवन कुम्हलाए शिशुओं को।
मत लेना व देना संक्रमण छूकर गन्दी जगह व गंदे हाथों से,
करते रहना साफ़ करकमलों को अच्छे साबुन-पानी से
दृष्टि का स्पर्श भी हो करुणामय, कभी न देखे बुरी नज़र से
बुरी नज़र देती है बुरा भाव, बचाना इस पाप से ।
बेहद घातक हो सकता है कुदृष्टि का परिणाम,
कई बार जानलेवा हो जाता इसका अंजाम ।
अधरों से अधरों का स्पर्श हो सीमित एक ही सच्चे प्रेमी तक,
सांसों का साँसों से संपर्क हो रहा है घातक
कपड़ा हो नाक मुँह पर हरदम
दो गज की दुरी रखना अंतिम साँसों को । *
कोरोना जैसी बीमारीयों के लिए राय
लेखक – लेफ्टिनेंट जनरल (डॉक्टर) शिवराम मेहता, सेवानिवृत
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