हर एक की ख्वाइश होती है बच्चों को अच्छी शिक्षा देने की,

इसके हैं चार स्तम्भ, अभिभावक, शिक्षक, बच्चे व सरकारें

इन सबके सुदृढ़ होने से ही सुधरेगी हालत दुनिया की।

जागरूक होकर निभानी होगी अभिभावकों को भूमिका,

न झाड़े पल्ला, अच्छी स्कूलों में भारी फीस देकर

ताउम्र असर रहता है परिवार के माहौल व परवरिश का।

एस क्यू व ई क्यू की पहली पाठशाला है परिवार,

ध्यान रहे धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष व बच्चे की रूचि पर अर्थ छा गया है

हर जगह करके बाकियों को दरकिरनार,

धन है जरुरी पर उपेक्षा ना हो सर्वांगीण विकास की

कोमल मन सीखता है देखकर अपनों का सही व्यव्हार।

नहीं नकार सकते शिक्षकों की भूमिका,

सही शिक्षक ही करेंगे सुधार भावी पीढ़ी का

वही पढ़ाएंगे पाठ पर्यावरण व जलवायु के रक्षण का

राष्ट्र का सही सेनापति होता है अध्यापक

अफ़सोस ! बेहद अभाव है सुशिक्षित गुरुओं का

शिक्षकों को अत्यंत जरुरत है खुद के शिक्षण की

सीखना होगा निरंतर बदलता स्वरुप कृत्रिम बुद्धि का

ए.आई. ले चुकी है अनेक क्षेत्रों में शिक्षकों की भूमिका

मुश्किल है कहना, कैसा होगा स्वरुप भावी शिक्षा का

कहीं रह ना जाये स्कूली शिक्षा सिर्फ औपचारिकता

विज्ञान कुछ भी कर ले पर प्रमुख स्थान रहेगा गुरुओं का,

विज्ञान, कर्त्तव्य व काम का संतुलन है जीवन में जरुरी

ए.आई. नहीं कर सकती निर्माण चरित्र का,

ए.आई. से कैसे होगा सुधार मानव व्यवहार और चरित्र का

कृत्रिम बुद्धि को बनाना होगा हम सबको अपना सहायक

कभी भी मत बनने देना इसको मालिक हम सब का

मन की शिक्षा व चरित्र सुधारना काम रहेगा गुरुओं का

मन की सही शिक्षा ही है पूरे जीवन का आधार

वर्तमान का यह ज्वलंत मुद्दा है शिक्षा के हर विषय का

वह तालीम बेकार है जो नहीं पढ़ाये पाठ भाईचारे का,

रुक जाती है मेरी सांसें देखकर माहौल कई स्कूलों का

खौफनाक दौर है स्कूलों में गोलीबारी का,

चूक हुई है उनकी शिक्षा में जो फैलाते हैं आतंक

सरकार भी बेबस है, देखकर ढेर बच्चे की लाशों का

सरकारें करें आत्म निरीक्षण अपनी योजनाओं का।

हर क्षेत्र में महत्व हो धर्मनिरपेक्षता व नैतिक शिक्षा पर,

रोकनी होगी ‘मैं एवं मेरा’ ऐसी संकीर्ण मानसिकता

नैतिक शिक्षा की कमी से है विश्व विनाश के कगार पर

बच्चे का धर्म कोई भी हो उसे मानव धर्म जरूर पढ़ाना

महत्व रखना होगा करुणा, प्यार, क्षमा व सहिष्णुता पर,

वरना छाया रहेगा तबाही का खौफ हम सब पर।

बच्चों ख्याल रखना आपके कर्तव्यों व स्वास्थ्य का,

खानपान रखना सही ताकि रहे इम्युनिटी मजबूत

स्वस्थ शरीर ही बन पायेगा आधार कड़ी मेहनत का,

आलस्य मत करना पीटी, व्यायाम, योगा करने में

शिक्षक अकेले नहीं कर पाएंगे सुधार आपके जीवन का।

मैं हूँ पूर्ण आशावादी, कुछ तो जरूर सुनेंगे मेरी अरदास,

गर नहीं मानी गई मेरी बातें तो मैं नहीं होने वाला उदास,

हाँ, जरूर होता रहेगा इस सुन्दर सृष्टि का विनाश।

ले. जनरल (डॉ.) शिवराम मेहता (रिटायर्ड)