सहकर्मी मिलेंगे अनेक तरह से,

कुछ को ही आप चुन पाते हैं,

बाकी तो जुड़े होते हैं आपके कर्म व पेशे से।

सतर्कता व छानबीन करके ही चुनना सेवादार,

गलत सेवक से रहता है चरित्र व जानमाल को खतरा,

गुणवान का चयन करके बना लेना उसको आधार

बर्ताव में रखना प्यार व करुणा का मिश्रण

सही व्यवहार से सुधरेगा उनका आचार-विचार

भूल कर भी मत करना अपमानित उन्हें,

सदैव रहना मदद करने को तैयार।

अक्सर होते हैं यह लोग जरूरतमंद,

इनकी देखभाल ही है असली इबादात,

हो सकते हैं कई आप जैसे भी अकलमंद,

बचपन में अवसरों की कमी से पिछड़ जाते हैं यह लोग,

तब ही तो रहते हैं कई आपके आशियानों में बंद।

छोटी-मोटी गलतियों को माफ़ करते रहना,

बेतुकी खट-पट ना हो किसी के साथ,

भूल-चूक से हुए नुकसान को भी नज़रअंदाज़ करना।

मदद करना और ख्याल रखना इनके परिवार का,

अच्छा खाना व उनके आराम का भी ध्यान रखना।

ठीक आचरण करना सहकर्मी व अधीनस्थ लोगों से,

सराहना व सहानुभूति से माहौल होगा सकारात्मक,

हर कार्य सुधरता है टीम को जोड़े रखने से,

आपकी प्रगति व शांति होगी सिर्फ इन्ही तरकीबों से।

सब निभाते हैं किरदार सहकर्मी व सेवादार का,

पति-पत्नी, पिता-पुत्र, छोटे-बड़े, गुरु-शिष्य,

इनमें होती है मालिक / सहायक की भूमिका,

अखरता है जब इन रिश्तों में होती है बदसलूकी,

दुरूपयोग एवं अभिमान ना हो किसी भी पद और हैसियत का।

ज़माना बदल गया है, मत करवाना घरेलु कार्य मतहत से,

नहीं हुई है इनकी नियुक्ति, बेगारी करने को,

अर्दली व्यवस्था चली आ रही है अंग्रेजों के ज़माने से,

तुरंत हटाना होगा इस कुप्रथा को जड़मूल से।

ले. जनरल (डॉ.) शिवराम मेहता (रिटायर्ड)