ईश वंदना से शुरू करता हूँ यह लेख।
उसके आशीर्वाद के बिना नहीं होता कोई कार्य
कई बार आजमाकर लिया यह देख।
लिख रहा हूँ यह कथा मेरे लिए कुछ अनुभव होंगे आपके लिए
टूटी – फूटी भाषा में यह सब सम्पर्पित प्रभु और आपको
आप भी मेरे प्रभु, प्रभु हम सबका, अच्छा नहीं लगे तो माफ़ करना मुझको।
भाषा का विशेष ज्ञान नहीं, फिर भी हिम्मत कर ली है
अंजाम कुछ भी हो अब तो लिखना जरूर है
इसके जरिये करूँगा इबादत परवर दीगार की
हार्दिक प्रबल इच्छा है ताकि हो कुछ उपासना उसकी।
पूरा यकीन है रहेगा ऊपर वाले का आशीर्वाद
इरादा नेक तो सफल होती हर कामना, कभी ना होता अवसाद।
उठाऊंगा अन्याय के खिलाफ आवाज
कड़वे होंगे कई तथ्य अनेक होंगे बेहद नाराज़
कहूंगा पूरे जोश से, ऊपर वाला एक
स्वार्थियों व अनभिज्ञों का इरादा कभी नहीं होता नेक।
क्यों गुमराह करते हो भोली-भाली जनता को ?
क्यों लूट मचा रखी है सवाल होगा अज्ञानियों को ?
शर्म क्यों नहीं आती है अकर्मण्य नेता व सरकारी नौकरों को ?
हाथ जोड़ विनती है अभिभावकों व शिक्षकों को
क्यों नहीं देते सही दिशा बच्चों को ?
सवाल होगा झगड़ालु हर नर-नारी से
क्यों नहीं रह सकते समता व प्रेम से ?
नर हूँ, बेधड़क मानता हूँ नर की कमियों को
पर ध्यान रहे, ताली नहीं बजती एक हाथ से।
बिठाओ सामंजस्य, घर, समाज व पूरे विश्व में
आखिर मैं कहूंगा, बेशुमार शक्ति है उस अबला में।
उठाऊंगा मुद्दा धर्मों का, क्यों गलत ढिंढोरा पीटते हो ?
जब ऊपर वाला एक है
मानलो अब तो, उस तक पहुँचने के तौर तरीके जरूर अनेक है।
क्यों बांटते हो, गते हो, बेसमझ नादानों को।
अपने तक ही सिमित रखो, अपने बेपाक इरादों को।
सेवा, प्यार, मानवता व भाईचारा से ऊपर कोई धर्म नहीं
ईमानदारी, वफादारी व सच्चाई के अलावा कोई धार्मिक सीख नहीं।
ज्ञात है नहीं सुधरेगी रातों – रात दुनिया
रहेगी व रहती आई है हर जगह कुछ कमियां।
पर सही बात लिखना है जरुरी, नहीं तो लगता है रह जायेगी जिंदगी अधूरी
ऊपर वाले ने मुझे बहुत कुछ दिया, मैंने की अनगिनत गलतियां।
हर बार बख्शा, अब सुधारना होगा तत्काल
नहीं तो विनाशकारी होगी हमारी व सरकार की स्वार्थ बार नीतियां।।
मानता हूँ इस लेख में नया नहीं कुछ भी
कई महान प्रकाशमय आत्माओँ ने दी है अनेक सच्ची सीख
उन्ही से कुछ ज्योति लेकर मैंने कर ली लिखने की हिम्मत
हर छोटी सी रौशनी की जरूर होती है कुछ कीमत
साधारण हूँ व कई तथ्यों से अनजान
फिर भी बहुत देखा व सीखा, आशा है इन बातों को जरूर पढ़ेंगे कुछ सुजान।
अच्छा लगे तो अपनाना, नहीं तो माफ़ करना मुझे मानकर अनजान।
ले. जनरल (डॉ.) शिवराम मेहता (रिटायर्ड)
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