बिना मांगे सलाह देने वाले बहुतेरे हैं इस जगत में,
आप भी ध्यान रखें, मत हो जाना शामिल इस भीड़ में
जब जरुरत पड़े सलाह की तो अनुभवी लोगों से ही बतलाना
दम होता है तजुर्बेदार और सफल हुए लोगों की राय में ।
अच्छे और निस्वार्थ लोगों को गौर से अवश्य सुनना,
सुनना सबकी पर अपने विवेक और हालात का भी ध्यान रखना
जिनमें है ढेरों बुराइयां उनकी नसीहत को हमेशा नकारना ।
ये तो अमल नहीं करते हैं सटीक राय, चाहे हो वो सच्चे लोगों की,
ऐसे ही लोग कहाँ मानते हैं सही शिक्षा माता-पिता और गुरुजनों की ।
अर्ज है, मुसीबत में पड़े हुए लोगों की और अवश्य ध्यान देना,
सत्कर्म है ऐसे लोगों के लिए सहानुभूति रखना व सांत्वना देना,
अगर हो सक्षम तो नसीहत के साथ उनका साथ भी निभाना
विवादित और समझ से परे मामलों में ठीक होता है चुप रहना ।
लेखक – लेफ्टिनेंट जनरल (डॉक्टर) शिवराम मेहता, सेवानिवृत
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