प्राणायाम, योग, ध्यान व मौन का घनिष्ठ संबंध है एक दुसरे से,
यह चारों तो हैं मन की शांति और आत्म चिंतन के अचूक साधन
होगी ऊर्जा संगृहीत, आध्यात्मिक व हर तरह की उन्नति इन्हीं से
यही तो है असली लगाम मानव मन में उठती बुराइयों की
होती है कम गलत दुर्वासनाएँ, भूख, और चिंता इनको साधने से
मिलेगा छुटकारा काम, मोह, लोभ, मद और मात्सर्य से (1,2)
आएगी स्थिरता व गंभीरता और बन जाओगे वीर गंभीर
रहोगे तंदुरुस्त और कर लोगे मुश्किल काम भी आसानी से ।
कम होगा तनाव, क्रोध व उतावलापन, होगा सामंजस्य जीवन में,
नहीं है ये मेरे मस्तिष्क की उपज, हैं इनके ठोस वैज्ञानिक प्रमाण
अगर जीना है सफल व शांतिदायक जीवन तो देरी ना हो इनको अपनाने में
आज की अफरा- तफरी व भाग दौड़ में यह है हर उम्र में जरूरी
मत रहना गलतफहमी में, नहीं काम चलेगा अगर अपनाओगे इन्हें बुढ़ापे में ।
बात हो जाए मौन की, जिसे कहा गया है मानसी तप गीता में (3)
इसकी महिमा है अपार देरी न हो यह समझने में
कई महाभारत व समस्याएं होती आई हैं अनर्गल बोलने से
प्रथम विश्व युद्ध के बाद 11 नवंबर को रखते है मौन शहीदों की याद में (4)
2 मिनट के मौन से श्रद्धांजलि दी जाती है दिवगंत आत्माओं को
वाणी के मौन के साथ अगर मन का मौन साध लिया तो आप विजयी होंगे हर युद्ध में । (5)
सन्दर्भ
- मद = मद के कई अर्थ होते हैं यहाँ यह घमंड के लिए इस्तेमाल किया गया है ।
- मात्सर्य = ईर्ष्या
- मन:प्रसाद: सौम्यत्वं मौनमात्मविनिग्रहः ।
भावसंशुद्धिरेत्येतत्तपो मानसमुच्यते ।।
श्रीमद्धभगवद गीता – 17 – 16
भावार्थ – मन की प्रसन्नता, सौम्यभाव, मौन, आत्म संयम और अन्तःकरण की शुद्धि यह सब मानस तप कहलाता है । - 11 /11/1918 को सुबह 11:00 बजे प्रथम विश्व युद्ध विराम लागु हुआ था, तभी से युद्ध में मारे गए सैनिकों को हर वर्ष 11 नवम्बर को श्रद्धांजलि दी जाती है ।
- Mouna ,silence of the mind is far superior to Mouna of speech. It must be natural. Forced Mouna is only wrestling with the mind.
It is an effort. If you live in Truth, Mouna will come of itself. — Swami Sivananda
जब मन स्थिर होता है तो उसकी मौन पवित्रता में ही सत्य स्वयं को प्रकट कर पाता है । – महर्षि अरविन्द
लेखक – लेफ्टिनेंट जनरल (डॉक्टर) शिवराम मेहता, सेवानिवृत
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