मन हो तो पूजा-पाठ जरूर करना अपने इष्ट का,

ढोंग, दिखावा व ढिंढोरा मत पीटना इसका

बुराई मत करना अन्यों की अर्चना की विधि का

है यह मसला अत्यंत निजी व अपनी-अपनी सोच का

किसी को अधिकार नहीं इस पर सवाल उठाने का।

धर्म की संकुचित सोच हो रही है विनाशकारी,

मजहबी कट्टरता व जड़वाद से हो रहा है महाविनाश,

इसी से उत्पन्न हो रही है आतंकवाद की महामारी।

मैं, मेरा मत ही है सही, यही है अज्ञानता की निशानी,

धर्म, जातिवाद व नस्लवाद के चक्कर में मत पड़ना

इसी से होती है समस्त संसार में कई तरह की हानि।

आस्थाओं की गलत सोच से हो रही है बेहद बर्बादी,

वंचित हो रहे हैं जायज अधिकारों से बच्चे व नारियां

भला नहीं होगा जब तक नहीं पनपेगी यह आबादी।

प्रकृति का विनाश हुआ है मानव की नासमझी से,

बचाना होगा प्रकृति को सुधार के हमें अपनी प्रवृति

प्रकृति दयालु है, खतरा मानव को है सिर्फ मानव से

आत्म चिंतन करना होगा सब धर्मावलम्बियों को

भारत महान बना था सभी धर्मों की सही सोच से

बदलाव प्रकृति का नियम है बदलें अपनी धारणाएं

अपनाना होगा अनेकता में सौहार्द का भाव फिर से

कायम रखनी होगी हर हाल में सामाजिक समरसता

हमारा पतन जरूर होगा संकीर्णता की सोच से

जीने दो सत्य के पुजारियों को उनकी समझ से।

यह लोग नहीं करेंगे कभी भी कोई अनैतिक कर्म

सेवा, कर्त्तव्य परायणता ही है धर्म का असली मर्म।

ऊपर उठना होगा जाति, धर्म व लिंग के भेदभाव से,

रखना है पूरे विश्व व भावी पीढ़ी को सुरक्षित,

बनाएंगे भारत को फिर से महान इन तरकीबों से।

वर्तमान में अधिकतर मानव है बेचैन व अशांत,

विकृत हो गए हैं उनके विचार, लेते हैं गलत निर्णय तबाही मची है हर जगह, अछूता नहीं कोई भी प्रांत

कई शीर्ष पर बैठे मानव भी है बेहद शातिर,

सही शिक्षा, ध्यान से ही होगा इन धूर्तों का मन शांत।

ले. जनरल (डॉ.) शिवराम मेहता (रिटायर्ड)