(70वां जन्मदिन)

यह विशेष दिन है प्रभु व असंख्य लोगों को धन्यवाद देने का,

याद अवश्य रखना जो रहे हैं आपके मददगार

यह शुभ अवसर तो फल है उन्हीं के आशीर्वादों का ।

स्मरण रहे अनेक लोगों का रहा है इसमें योगदान,

मानता हूं आप भी तो रहे हैं बेहद सावधान

तभी तो हासिल कर पाए हो आप यह पायदान

आगे के समय पर आपको देना होगा खुद पर बहुत ध्यान ।

स्वीकारता हूॅं आप में है अभी भी बहुत क्षमता बाकी,

अब समय आ गया है धीरज धारण रखना हर क्षण

शरीर नहीं झेल पाएगा आपकी पुरानी आदतें आपा-धापी की

हर गति कर लेना धीमी ताकि ना गिरो लड़खड़ा कर

आक्रोश और उतावलेपन से बिगड़ जाती है जिंदगी अनेकों की

रखना मन को शांत, संतुष्टि मिलती है इसी भावना से

जरूरी है शारीरिक व मानसिक सक्रियता को बनाए रखने की

ध्यान,योगा व हल्की-फुल्की वर्जिश शामिल रखना दिनचर्या में

आदत रखना प्रकृति की सुंदरता को निहारने की

इन सबसे अवश्य रहेगा आपका तन-मन चंगा व तंदुरुस्त

कोई नया शोक पालना, जारी रखना आदत पढ़ने लिखने की

मेलजोल और संवाद जारी रखना यार दोस्तों से

समय-समय पर राय जरूर लेते रहना चिकित्सकों की

मत देना किसी को भी राय बिना मांगे

भूल मत करना औरों के निजी मामलों में हस्तक्षेप करने की

क्षमता के अनुसार मदद करते रहना जरूरतमंदों की ।

बिछड़ेंगे कई अपने झेलनी पड़ेगी विरह की वेदना,

होनी को कोई नहीं टाल सकता इसे सहृदय स्वीकारना ।

लेखक – लेफ्टिनेंट जनरल (डॉक्टर) शिवराम मेहता, सेवानिवृत