आज पूरे विश्व की ज्वलंत समस्या है दूषित समस्त पर्यावरण,

वायु, जल, जलवायु व मिट्टी बर्बाद हो रहे हैं हमारे सारे आवरण,

वजह है प्राकृतिक संसाधनों का दोहन व प्रकृति से छेड़छाड़

हम सबका जिम्मा है कि करे हम इसका सम्पूर्ण संरक्षण।

अब नहीं जागे तो खुल जाएंगे बर्बादी के सब द्वार,

विकट संकट है आज प्रकृति व हर जीव जंतु के लिए

जागरूक रहो वर्ना झेलनी पड़ेगी तकरार व हर जगह हार।

भूलो मत, सम्पूर्ण जीवों का संरक्षण करता है पर्यावरण,

कोई नहीं सह पायेगा कहर ग्लोबल वार्मिंग व वायु प्रदुषण का

कैसे सहन करेंगे जीव अम्ल वर्षा व समुद्रों का अम्लीकरण

हो रहे हैं छेड़ ओजोन परत में, पिघल रही है ग्लेशियर की बर्फ

ग्रीन गैसों की अधिकता व पेड़ों की कमी से बढ़ रहा है प्रदुषण

प्लास्टिक एवं अन्य खतरनाक कचरे के ढेर हैं चारों तरफ

मत करो नादानी देकर समस्याओं व बीमारियों को आमंत्रण।

वर्षा के क्षेत्रों व समय में होता रहेगा बदलाव अल नीनो से,

मानता हूँ इसका कोई सटीक उपाय नहीं है हमारे बस में

हमें करना होगा जीवन शैली में बदलाव व तालमेल प्रकृति से

शर्तिया है गर अभी नहीं जागे तो फिर नहीं मिलेगा मौका दोबारा

जोर रखो जैविक भोजन पर, जिओ अपना जीवन सरलता से।

सुधारो मानवीय पर्यावरण यह भी अहम मुद्दा है जीवन का,

असर होता है धर्म, शिक्षा, परिवार व अन्य क्रियाकलापों का।

पढ़ाओ बच्चों को पर्यावरण व जोड़ो रमणीय प्रकृति से,

जनसँख्या में बेहिसाब वृद्धि करती है पूरा माहौल दूषित

पूरे विश्व का अस्तित्व डगमगा जाएगा बढ़ती जनसँख्या से

मेरे देशवासियों मत इतराओ जनसँख्या में नंबर वन होने पर

सुधारो इस विस्फोट को राजनेता व जन मानस के तालमेल से

एक गड़बड़ी व गलती पैदा करती है भयंकर दुष्चक्र

सब कुछ नहीं, पर बहुत कुछ सुधरेगा हमारे प्रयासों से।

इसलिए तो हिदायतें हैं सभी धर्मों के ग्रंथों में,

वेदों में वर्णित है पर्यावरण संतुलन की सटीक जानकारियां

भूमि को माँ और मेघ को पिता कहा गया है अथर्ववेद में (1)

पर्यावरण की क्षति करने वालों को खुराफाती माना गया है कुरान में

बाइबिल में हिदायते हैं मानव निर्मित पर्यावरण सुधारने की

समझ नहीं पा रहा हूँ बदलाव क्यों नहीं आता मानव सोच में?

(1) अथर्ववेद – 12.1.12 – माता भूमि: पुत्रों अहं पृथिव्या: __

(2) कुरान मजीद-सूरा 14:32-34 __अल्लाह ने तुम्हें सब कुछ दिया —-वास्तविकता यह है की इंसान बड़ा ही बेइन्साफ़ और अकृतज्ञ है

(3) बाइबिल – GALATIANS (गलतियों)-5:22-23 __आत्मा का फल, प्रेम, आनंद, मेल, धीरज, कृपा, भलाई, विश्वास, नम्रता और संयम है

लेखक – लेफ्टिनेंट जनरल (डॉक्टर) शिवराम मेहता, सेवानिवृत