हम पनपते, पलते व विकसित होते परिवार से,

जरूर कुम्हला जायेंगे कुटुंब से दूर होने पर,

सदैव जुड़े रहना अपने कुनबे की जड़ों से,

कई पहियों व कलाओं से चलता है मानव जीवन,

मित्रता व आदर भाव बरक़रार रखें जीवनसाथी से।

सामंजस्य बिठाये पति-पत्नी वरना लग जाएगा ग्रहण,

अहम है माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी,

आनंद के स्त्रोत है बेटा-बेटी, भाई-बहिन।

सम्मान हो देवरानी, जेठानी, भौजाई व ननदों का,

मान कम ना हो मामा-मामी, बुआ-फूफा व भतीजों का,

ख़ास ख्याल रखना, साला-साली व जवाईयों का,

योगदान मत भूलना सच्चे मित्रों का।

आजीविका की बदलती परिस्थितियों ने छोटे कर दिए हैं परिवार,

अकेले हो गये हैं बुजुर्ग, वयस्क व बच्चे,

नहीं मिल रहा है अपनों का वांछित मार्गदर्शन व दुलार-प्यार,

जो होता है ख़ुशी, उन्नति व मस्तिष्क का असली आहार।

तरकीब सिर्फ एक ही है, जुड़े रहना भावनात्मक रूप से,

मुश्किल की घड़ी में अमन-चैन मिलेगा अपनों से।

याद करना उनको जन्मदिन व अन्य सुअवसरों पर,

ख़बरों का लेन-देन जारी रखना मोबाइल पर.

मिलने की कोशिश करना, छोटे-मोटे तोहफे देना सही मौकों पर।

जब अपने दूर हो जाए, होकर मतलबी व निष्ठुर,

फिक्र मत करना, होता आया है ऐसा सदियों से,

प्रयास करते रहना जुड़ाव के लिए, कुछ हक़ त्यागने को भी रहना आतुर।

रूठ जाते हैं अपने कई कारणों से,

कोशिश करते रहना उन्हें मनाने की,

खुद की गलती का आंकलन करना ठन्डे दिमाग से,

स्वीकारना उन्हें वे जैसे भी हैं, मत करना अपमानित,

ऐसे मामलों में बचना बदजबान, अहंकार व लापरवाही की प्रवृति से,

स्मरण रहे वे भी तो उपजे हैं आपकी ही जमीन पर,

आपकी उन्नति व खुशहाली होगी, अच्छे संबंधों से।

बच्चों याद रखना, बड़े-बूढ़ों का अनुभव होता है कीमती,

यह काम आ सकता है, जब आन पड़े कोई विपत्ति,

परिवार की ताकत से आसान होगा, सहना हर चुनौती।

ले. जनरल (डॉ.) शिवराम मेहता (रिटायर्ड)