(सही लोगों से चर्चा करके सुधारना हालात को) छोटी-मोटी चिंता है स्वाभाविक उठती है हर मन में, ध्यान रहे यह घोंसला न बना ले आपके मस्तिष्क में। थोड़ा क्षणिक फिक्र कई बार हो सकता है फायदेमंद, इससे सुधार लेते हैं अपने कई कार्य अकलमंद। तनाव होता है परिस्थिति और मन:स्थिति के तालमेल की कमी से, […]
Read More(कर्म व अर्थ का मिश्रण) विवाह के बाद होगा मधुर व सुगम जीवन गृहस्थ का, बशर्ते की आप ले लो सबक एक दूजे को सहने का। कमी ना हो पारस्परिक विश्वास व धैर्य रखने में, मत होना खुदगर्ज़, रखना हमसफ़र का मान-सम्मान, सीखना जगह देना, पूरक होंगे समाके एक दूजे में हर हालत में बरक़रार […]
Read Moreसपने में देखा मेरी शव यात्रा निकलते हुए, भ्रम में था जगत सुना हो जाएगा मेरे बिना स्तब्ध रह गया देख भीड़ मेरी जगह लेने के लिए। कितने अँधेरे में जीता है मानव, क्या-क्या जाल बिछाकर मचाता है तांडव। स्वप्न सीख दे गया मत पड़ो झूठे घपलों में, तुरंत सुधरो पकड़ो सच को इसी जीवन […]
Read Moreकभी ना भूलें हमारा प्रथम कर्त्तव्य जो है प्रफुल्लित रहना, आनंद है हमारी प्रकृति में व्याप्त बस इसे संजोये रखना इसे पाने के लिए कहीं नहीं जाना पड़ेगा दूर हमारे मस्तिष्क में है इसका भरपूर खजाना। हर मानव मूलतः सच्चिदानंद है, हम आनंद से उपजे हैं व आनंद में जीते हैं मृत्युपरांत भी हम आनंद […]
Read MoreLt Gen (Dr.) S.R. Mehta, Chairman SREE Foundation Interview with National TV
Read More(मानव ही सृष्टि का उद्धार करेंगे।) वर्तमान में सम्पूर्ण जीव-जगत व पर्यावरण का जो पतन हो रहा है उसका मुख्य कारण मानव में आयी दैवीसम्पदा की कमी है। आज हर जगह डर, असुरक्षा, युद्धों की भीषण दहशत, बड़े राष्ट्रों द्वारा छोटे राष्ट्रों को हड़पने की लालसा, महामारियां, आबादी का विस्थापन, भुखमरी, बेरोजगारी, राजनीतिक अशांति, भूमंडलीय […]
Read Moreरंग फीके हो सकते हैं, पर रखना इन्हें हर्षित, परवाह मत करना, हो सकता है बहुत कुछ दूषित। कमजोर हुई है, मिटी नहीं है महामारी, डरा रही है महँगाई, ले रहे हैं युद्ध विकराल रूप पर जरूर खेलना प्यार की होली अबकी बारी। हो विप्पति भयंकर तो भी मत होने देना कम उल्लास मन का […]
Read Moreस्वस्थ, आत्मिक यौन अभिव्यक्ति स्वाभाविक पहलु है सफल जीवन का, शारीरिक ही नहीं मानसिक तौर पर भी है इसकी अहम भूमिका। छुपा है इसमें पति-पत्नी व समस्त परिवार की खुशहाली का रहस्य, इसके बिना रह सकता है अधूरा हमारा जीवन साधू-संतों की बात अलग है, यह है उनका निर्णय हाँ, 20 -25 वर्ष तक बृह्मचार्य […]
Read Moreजीया हूँ कई वर्ष इस पेशे में, देखी है अनेक बीमारियां व उतार-चढ़ाव सैनिकों व आम जनता के जीवन में। सीख बहुत मिली जब देखा मौत को बहुत करीब से, तुरंत सुधरा जैसे ही की मैंने गलतियां बहुत कुछ और सीखा मृत्यु से बचे हुए मरीज़ों से। प्रभु ने सब कुछ दिया मुझे इस पेशे […]
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