जीया हूँ कई वर्ष इस पेशे में,
देखी है अनेक बीमारियां व उतार-चढ़ाव
सैनिकों व आम जनता के जीवन में।
सीख बहुत मिली जब देखा मौत को बहुत करीब से,
तुरंत सुधरा जैसे ही की मैंने गलतियां
बहुत कुछ और सीखा मृत्यु से बचे हुए मरीज़ों से।
प्रभु ने सब कुछ दिया मुझे इस पेशे में,
हाँ, मैंने कोताही नहीं की कड़ी मेहनत करने में
अभी भी कोशिश जारी है कुछ नया सीखने की
निपुण तो कोई नहीं हो सकता इस धंधे में।
ताउम्र रहेगा पछतावा अगर नहीं अर्जित किया गुरुओं से पूरा ज्ञान,
हर पल होते नए आविष्कारों से सीख जरूर लेना
इससे रख पाओगे रोगी का ध्यान और खुद का मान-सम्मान
ध्यान रहे एक ही बीमारी के लक्षण नहीं होते हरेक में एक समान
हर मानव की संरचना होती है अलग-थलग
जो दवा एक की जान बचाती वह कई बार ले लेती है दूसरे की जान
शरीर है ब्रह्माण्ड, कोई भी हांसिल नहीं कर पाया इसका पूरा ज्ञान।
सुनना मरीज की कहानी बहुत ही तसल्ली व ध्यान से,
यह कथा होती है अहम व सर्वोपरि आया सारी जांचों से।
अगर हो रत्ती भर भी शक बीमारी के निदान में,
तो देरी मत करना वरिष्टजनों की राय लेने में,
एक से दो भले होते हैं इस पेशे में।
जांच व दवा लिखना सोच समझकर, फ़िज़ूल के विटामिनो व टेस्टों से मत भरना पर्चा
विटामिनो की जरुरत होती है बहुत काम मरीज़ों को
मत करवाना गरीबों से अनुचित खर्चा।
गैर जरुरी दवा कर सकती है खास दवा को बेअसर
हर दवा है दुधारी तलवार कहीं पड़ ना जाए मरीज़ पर दोहरी मार
घटिया कंपनी की दवा से भी रहना दूर
इन दवाओं से जा सकता है मरीज़ मौत के मुँह में
मत पड़ना इनके चक्कर में मेरे हुज़ूर,
फीस लेना वाजिब, गाला मत काट लेना,
जो बेशुमार फीस ले रहे उन्हें जरा समझाना
नीचे के तबके वालों को कभी-कभार तो मुफ्त में देखना
मनोभाव समझना व मित्रवत बने रहना
रोगी की निजता का ध्यान रखना व पूरा सम्मान देना
पहले नेक इंसान बनना फिर डॉक्टरी की सोचना
इंसानियत की कमी से ही कई करते हैं मानव अंगों की तस्करी का धंधा घिनोना
शायद कुछ पथ भ्रष्टों की ही देन थी महामारी कोरोना।
चिकित्सा ज्ञान के अलावा भी कुछ अन्य गुण अत्यंत जरुरी,
सदगुणों व सेवा भाव से ओतप्रोत हो आपका व्यक्तित्व
इनके बिना रह जायेगी आपकी सारी डॉक्टरी अधूरी।
चिकित्सक के व्यवहार व दो मीठे शब्दों में होती है जादुई ताकत,
इससे जरूर मिट जाती है मरीज़ की बहुत सी आफत।
घातक असाध्य रोग हो तो भी निराश होकर हाथ खड़े मत करना,
हाँ, उल्टे -सीधे दावे करने से जरूर बचना
जब तक सांस है तब तक आस जरूर रखना
जीवन भर विद्यार्थी बने रहना
इलाज़ में आपकी ही नहीं, आपकी पूरी टीम की होती है अहम भूमिका
सब सदस्यों को मान-सम्मान देना व अनेक मित्र व गुरु बने रहना।
तमन्ना थी कई वर्षों से यह परामर्श आपसे साझा करने की,
कुछ अपनाओगे तो जरूर साख बढ़ेगी आपकी व पूरी बिरादरी की।
ले. जनरल (डॉ.) शिवराम मेहता (रिटायर्ड)
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