मेहरबान हुई प्रकृति ईश्वर का उपहार मिला
जन्म हुआ, अहम् उत्सव, घर वालों को शकुन मिला।
ज्योतिषी ने फ़रमाया, लड़का नहीं जन्मा शुभ मुहूर्त में.
बहुत हुई पूजा, दान-दक्षिणा, मचा बहुत हंगामा
बच्चा बना खगोल यात्री, उड़ता पूरे ब्रह्माण्ड में
पडोसी के बच्चों का जन्म बताया शुभ मुहूर्त में
वह बन गया डॉन, रहता ज्यादा जेल में
हम समझे नहीं जन्म जैसा महान तोहफा
प्रभु कैसे देगा अशुभ घडी में
हर पल व घडी होती है महान
मत आओ इनके बहकावे में।।
कौन क्या बनेगा निर्भर है अनगिनत कारकों पर ?
मत समझो कोई भी पल अशुभ
इस नकली निमित्तविदों (शकुन जानने वाला, ज्योतिषी) के कहने पर।।
दूसरी कहानी सुनो, दुविधा हमारी चचेरी बहिन की।
बहिन के जन्मी सुरूप कन्या, पर छाया पूरे परिवार में सन्नाटा
कोई ज्यादा उत्सव नहीं, क्या गलती थी माँ-बेटी की ?
यह क्या बहुमूल्य भेंट से कोई खुश क्यों नहीं ?
प्रकृति ने महान प्रकृति रची इसमें मुझे संदेह नहीं।।
मैं क्या जानु भेद-भाव से लथ-पथ है यह दुनिया।
बेवजह सब हुए खिन्न, बेकसूर थी नन्ही मुनिया।।
खान-पान, शिक्षा के लिए भी जोर रहा सुपुत्र पर।
जी मसोस अवेहलना सही कन्यायों ने अक्सर
फिर भी हार कइयों ने नहीं मानी
मुकाबला करती रही कमर कसकर
अब पहुँच रही अनेक महान शिखरों पर।।
बिताये सुनीता विल्लियम्स ने 127 दिन अंतरिक्ष में
तैनात मिल जायेगी कई बेटियां सरहद के मोर्चों में।
गुमान होता है, जब बेटियां जूप जाती है अर्थियों में।।
नर-मादा जीवन वाहन के दो पहिये, पहचानो यह भेद।
मत नकारो कन्या को जान बूझकर
सहन के परे है यह खेद।।
सास, बहु, बेटी, बहिन का किरदार निभाती वो
नो महीने हमारा भार भी सहती आयी है वो।
विषम परिस्थितियों में भी ज्यादा पीड़ा सहती आयी है नारी
देखा है अक्सर, उसने हिम्मत फिर भी नहीं हारी।
न हो उसकी अवहेलना, मत होने देना उसे हताश
कुटुंब हो जाता है बर्बाद, जिस घर में नारी रहती है उदास।
विनती है श्रद्देय नारी रत्नो से
आधुनिक माहौल की चमक में अपनी सोच सही रखना
ख्याल रहे, कोई कमी घर न करले आचरण में
समझना नर को बराबर का दर्जा देना।।
मत मांगना बेहिसाब का हक़, न करना नाजायज़ मांग।
कठिन, कटु सत्य, उलट फेर से लथ-पथ समग्र दुनिया
बुरा मत मानना, रिक्त मांग से अक्सर सुन्दर होगी, भरित मांग।।
ले. जनरल (डॉ.) शिवराम मेहता (रिटायर्ड)
Bimal
Very nice. Excellent expressions