हर पल होती है विवशता अनेकों बार,
आएगा कई तरह का दबाव बार-बार
अपनाना लचीलापन, धैर्य के साथ
बचा लेना भावनात्मक समझ से अपनी हार।
झुकने, सहज रहने में फायदा है ऐसे मौकों पर,
तालमेल बिठाना अंतर्मन व प्रतिक्रियाओं पर।
रहना पड़ सकता है निष्ठुर माँ-बाप के साये में,
संभालना खुद को दूर नहीं जा सकोगे इनसे,
पनपते आये हैं शेर भी टूटी-फूटी गुफाओं में,
व्यर्थ का दबाव भी सहना होता है माँ-बाप का,
बच्चों मेहनत करना मानसिक शांति रखते हुए
फ़िक्र कतई ना हो परीक्षा के परिणामों का
परिश्रमी हांसिल कर लेता है सब कुछ,
वह जीत लेता है दुनिया व मन अभिभावकों का।
पाला पड़ सकता है अक्षम अध्यापकों से,
सहने पड़ते है कई बार हठधर्मी जीवनसाथी
मुनासिब होगा झेलना उनको आदर भाव से।
बेवजह दबाव सहना होता है अधिकारीयों का,
यहाँ आ जाता है सवाल रोजी रोटी का,
अनेक कार्यकर्ता भी फंस जाते हैं इसी भंवर में,
ये बेचारे ठेका ले लेते हैं झूठे कर्म करने का,
मजबूर है कई नेता नहीं कर पाते हैं अच्छे कार्य
है यहाँ मामला कुर्सी और वोट बटोरने का,
करते हैं यह बेहाल अपनी मानसिक शांति का
अपनाकर सेवा भाव व त्याग की भावना
उपाय किया जा सकता है इन दुविधाओं का
जीवन में मंजर रहता आया है बेबसी का
आती है कई मजबूरियां व बीमारियां बुढ़ापे में,
मत होना विचलित, है यह भी पहलु जीवन का,
ढूंढना तरकीब व सीख लेना जीना बेबसी में
ना होना उदास, ढांढस बढ़ाते रहना खुद का
छुपाने पड़ते हैं कई रहस्य मजबूरन
निहित है भला इसी में खुद और अपनों का।
ले. जनरल (डॉ.) शिवराम मेहता (रिटायर्ड)
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