हर जीव की जननी से महान कोई नहीं सृष्टि में,
देखा होगा मादा पक्षियों को अंडों को सेते हुए,
कितने प्यार से बच्चों को वे दाना देते हैं उनकी चौंच में।
लगाए रखती है वानरी मृत शावक को भी छाती से,
भिड़ जाती है कई मायें अपने से ताकतवर जानवरों से,
बचाने को अपने मासूमों की जान हमलावरों से।
हर नारी है माँ, शास्त्रों ने बांटा है इन्हें सोलह श्रेणियों में,
इन्ही श्रेणियों में सदैव याद रखी जायेगी माँ पन्ना धाय (1)
माँ ही है महान मूर्ति त्याग की इस जहान में।
कन्याओं भूलकर भी मत अनदेखी करना माँ की सीख,
वही है तुम्हारी अभिन्न मित्र, सच्ची गुरु व अंतिम शरण,
भटकने पर उसके अलावा कोई नहीं देगा तुम्हें भीख।
बच्चों मत करना गलत काम वरना कहलाओगे कपूत,
मातृ आशीर्वाद बना रहेगा अगर तुम रहोगे सदैव सपूत।
गदगद हो जाता हूँ, याद करके मेरी माँ के त्याग को,
माताजी ने मान लिया था आदेश मेरी दादी माँ का,
वह था मेरे जन्मते ही मुझे गोद देने अपनी जेठानी को (2)
हैरान थे सब क्योंकि मेरा कोई बड़ा भाई नहीं था,
भाग्यशाली हूँ, दो माताओं का प्यार मिला था।
लालन-पालन करने वाली माँ का कद भी कम नहीं है,
श्री कृष्ण का नाम देवकीनंदन हीं नहीं यशोदानन्दन भी है,
जिंदगी का फलसफा पूछना जिसके माँ नहीं होती है।
सुकून पाना हो तो छुप जाना माँ की गोद में,
इससे ज्यादा आनंद नहीं मिलेगा किसी भी स्वर्ग में,
मैया ही होती है हमारी पहली सर्वोत्तम शिक्षक,
करती है वह मार्गदर्शन अपने कुनबे का हर हाल में,
भूलकर भी चूक ना हो, माँ की सेवा सुश्रिता में,
कोई भी क़र्ज़ नहीं चुका सकता है माँ के प्यार का,
हर्ज़ नहीं अगर कहूं की माँ ही असली रूप है ईश्वर का,
माँ तेरी ही कोख से जन्म लेते हैं देवता व ईश्वर,
जमाना है किराये की कोख व परखनली के बच्चों का,
विज्ञान चाहे जितनी उन्नति कर ले,
सर्वोपरि स्थान सदा रहेगा प्राकृतिक माँ का।
जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी
(जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर है।)
लेफ्टिनेंट जनरल (डॉक्टर) शिवराम मेहता, सेवानिवृत
सन्दर्भ –
(1) पन्ना धाय को महान बलिदान के लिए याद किया जाता है जिसने 1536 ईस्वी में अपने एकमात्र पुत्र चन्दन का बाल्यावस्था में ही बलिदान देकर मेवाड़ राज्य के कुलदीपक उदय सिंह की रक्षा की थी। Ojha, G.H. (2000)
PRATAPGARH RAJYA KA ITIHAAS
(https://books.google.com/books?id=AjRuAAAAMAAJ)
(2) लेफ्टिनेंट जनरल (डॉक्टर) शिवराम मेहता, सेवानिवृत, मेरे अनुभव और सुझाव, (SKP Publishing House Jaipur, 2019 ), अध्याय 2, 17 – 18. (www.shivrammehta.in)
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