लक्ष्य हो स्वयं को जानना और कर्त्तव्य को पहचानना,
उद्देश्य हो, रूचि के अनुसार ज्ञान हासिल करना
कौनसा काम पहले हो, ये तय जरूर करना
ताउम्र विद्यार्थी बनकर सद्गुरु की शरण में रहना
ताकि रह सको ईर्ष्या, द्वेष व भेदभाव से दूर
सीखना जीवन को गुणकारी व उपयोगी बनाना
समग्रता से खिलना, खुलना और खेलना
ध्यान रहे, किसी भी हाल में मनोबल ना टूटे
मदद प्रकृति से मिलती रहेगी, यह याद रखना
इस प्रकार जीकर संसार के लिए मिसाल बनना
प्यार व इज्जत ले-देकर आनंदपूर्वक जीना
लक्ष्य प्राप्ति में जिन्होंने मदद की उन्हें मत भूलना।
जरूर हो कुछ उद्देश्य सेवानिवृति के उपरांत भी,
ध्येय रखना जरुरी होता है अंतिम साँसों तक
ताकि बोरियत ना हांसिल हो आप पर कभी भी।
हर्ज़ नहीं बताने में, हो कोई उद्देश्य मरणोपरांत का,
अत्यंत ख़ुशी की बात सुनलो इस आखिरी इच्छा की
उलहाना नहीं मिलेगा अंतिम लक्ष्य पूरा नहीं होने का।
धैर्य मत छोड़ना, हड़बड़ी से बिगड़ता है हर कार्य,
ठहरना, सोचना, समझना, फिर करना शुरुआत
प्राथमिकता तय कर योजनामय हो प्रत्येक कार्य
गैर जरुरी कार्यों को पहले अहमियत देने से
बिगड़ सकते हैं वो कार्य जो होते हैं अनिवार्य।
योजना पूर्वक कार्यरत रहने से मन रहता है शांत,
अवश्य करते रहना आंकलन समय-समय पर,
बिगड़ जाते हैं कई कार्य हर सावधानी के उपरांत।
मत लेना तनाव, पूरे जोश – खरोश से आगे बढ़ना,
संतुष्टि व शांति चाहिए तो फिर से शुरू हो जाना।
ले. जनरल (डॉ.) शिवराम मेहता (रिटायर्ड)
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