कृतज्ञता से मिलती है ख़ुशी और संतुष्टि जीवन में,
अपनाएं रखना इसे सदैव अपनी जागरूकता से,
यह मदद करती है आपके बिगड़े सम्बन्ध सुधारने में
आभारी रहना माता-पिता का जिन्होंने आपको पाला-पोसा
मत भूलना उनके कष्टों को जो झेले हैं आपको लायक बनाने में
कमी ना हो इनको धन्यवाद देने व आभार प्रकट करने में ।
गुणग्रही रहना ईश्वर व गुरुओं का जिन्होंने सब कुछ सिखाया,
बहुत कुछ दिया है इन्होने जो नहीं जा सकता भुलाया।
सब धर्म ग्रंथों में सीख है ईश्वर के उपकारों को न भूलने की (1)
याद रखना अपने आशीर्वादों को यह रखेंगे आपको आशावादी
कृतज्ञता के बिना होगा आपका जीवन निराशाजनक व एकाकी
कृतज्ञ लोग होते हैं धैर्यवान, दयालु, विनम्र और उपकारी
मिलता है सामाजिक समर्थन, कमी नहीं होती है आत्मसम्मान की ।
सन्दर्भ
(1) हे मेरे मन, ईश्वर का धन्यवाद कह और उसके किसी भी उपकार को न भूलना, पवित्र बाइबिल, भजन संहिता (PSALMS),103-2
लेखक – लेफ्टिनेंट जनरल (डॉक्टर) शिवराम मेहता, सेवानिवृत
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