सम्पूर्ण स्वास्थ्य का ध्यान रखना ही है ख़ुशी का असली आधार,

ध्यान देना होगा शारीरिक, मानसिक व बौद्धिक स्वास्थ्य पर

स्वास्थ्य कायम रखना लेकर सात्विक, संतुलित, सम्पूर्ण आहार।

स्वस्थ मानव ही खुश रहता है और ख़ुशी बाँट सकता है,

अस्वस्थ मनुष्य कैसे करेगा धर्म, ससचिन्तन व अर्थोपार्जन

ख़ुशी व सफलता धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष में निहित है।

धर्म का असली रूप है सेवा, उद्धारता व विनम्रता,

इन्ही गुणों से मिलती है जीवन में ख़ुशी व सफलता।

संसार से लेने की आशा कम रखना,

दूसरों को सुख देने में जो आनंद है वह लूटने में कहाँ

लगाव ही है दुखों का मुख्य कारण इससे इससे जरूर दूर रहना

रहना खुद से प्रसन्न, संतुष्ट व तृप्त

प्रसन्नचित्त रहने के लिए सीखना अपना दृष्टिकोण बदलना।

ख़ुशी का स्रोत हमारे भीतर है,

हम ढूंढते फिरते हैं इसे अन्य लोगों में व जगह पर

ध्यान व योग हर दिन व हर हाल में करना है

हमको अपने भीतर व स्वयं से खुश रहना है

दूसरों से खुद की तुलना कभी नहीं करना

आप जैसे भी हैं बहुतों से बहुत अच्छे हैं

स्मरण रहे प्रियजनों से बिछड़ना जीवन का एक हिस्सा है

हार-जीत, सुख-दुःख होते हैं हर जीवन के अहम पहलु

सीख जरूर लेना इन परिस्थितियों से, घबराना कतई नहीं है

अन्य लोगों से ज़्यादा उम्मीदें रखना भी ठीक नहीं

उम्मीदें टूटने से घृणा, दुःख व ईर्ष्या उत्पन्न होती है।

लोगों को माफ़ करना, खुद की गलतियों पर तुरंत माफ़ी माँगना,

क्षमा से सदैव भरता है खुशियों का खजाना।

पड़ेगा पाला बहुत दुखदायी व भ्रष्ट लोगों से,

आप सही रहना, डरना व उलझना मत उनसे

इसी तरकीब से कोई नहीं छीन पायेगा ख़ुशी आपसे।

महत्वपूर्ण करीबी रिश्ते हरदम कायम रखना,

कम बोलने व विनम्रता से सुनने से होगा खुशियों में इजाफा

खुद की आलोचना सुनने की हिम्मत सदैव रखना

सदा सुखी रहोगे इन आदतों से, नहीं पड़ेगा पछताना

प्रकृति के बीच कुछ समय रोज बिताना।

यह सिखाती है हमें देना व करती है हमें अनुशासित,

सूर्योदय व सूर्यास्त में सुनना पक्षियों की चहचाहट

रमणीय प्रकृति में सदा रहेगा आनंदित हमारा चित्त।

लेखक – लेफ्टिनेंट जनरल (डॉक्टर) शिवराम मेहता, सेवानिवृत