“श्रेष्ट व्यक्ति वह है जो अपने बारे में सोचता है” – हीसियड (ग्रीक कवि)
कितनी ही हो व्यस्त जीवन शैली थोड़ा समय खुद को भी देना
रखना काम व निजी समय के बीच स्पष्ट रेखा
सीख लेना कम जरूरी कामों के लिए विनम्रता से ना कहना
बुरा नहीं होता अपनी ख़ुशी के लिए थोड़ा स्वार्थी होना
वर्तमान की आपा-धापी में मत कर लेना जीवन के आनन्द कम
गलत है बेवजह मोबाइल व अन्य उपकरणों से जुड़े रहना
फ़िज़ूल की गपशप में समय बर्बाद ना हो
कोई आपकी तरफ गेंद फेके तो जरूरी नहीं उसे लपकना
मत बिगाड़ना दिनचर्या, आकर औरों के बहकावे में
अपने कार्यों में कुशल होने की कोशिश सदैव करते रहना
बिगाड़ रहे हैं कई लोग पूरा जीवन बिना आराम काम करके
जरूरी होता है समय-समय पर छोटी-छोटी छुट्टियाॅं लेना
इसी से कर पाओगे अच्छा काम और रहोगे सदैव तरो-ताजा
बच्चे व परिवार के लिए रोज कुछ समय निर्धारित रखना
कठिन समय में कोई काम नहीं आएगा आपके इनके अतिरिक्त
अपनी अच्छी इच्छाओं को अहमियत जरूर देते रहना
जरूरी है कुछ शौक पालना ताकि रह सको हमेशा तंदुरुस्त
फायदे में रहोगे अगर करोगे ध्यान और जुड़ोगे आध्यात्मिकता से
कभी कभार अकेले में भी कुछ समय अवश्य बिताना
इस दौरान कुछ पढ़ना, यात्रा करना ताकि हो सको मानसिक रूप से डिटॉक्स
दुनिया की देखभाल से पहले स्व देखभाल व खुद से प्यार करना ।
“Charity begins at home” – याद रखना
“वो लोग जो अच्छाई करने में बहुत ज्यादा व्यस्त होते हैं, स्वयं अच्छा होने के लिए समय नहीं निकाल पाते ।” —- रबीन्द्रनाथ ठाकुर
लेखक – लेफ्टिनेंट जनरल (डॉक्टर) शिवराम मेहता, सेवानिवृत
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