(सावधानी व समझदारी ही बचाव)

अहम पूँजी है स्वास्थ्य, इसका है गहरा रिश्ता खान-पान से,

स्वादिष्ट व्यंजन किसको नहीं लगता अच्छा ?

इसे हर कोई परोसता व खाता शान से

स्वाद पर नियंत्रण है जरुरी

अगर बचना है अपच व मोटापे से

मोटापे का घनिष्ठ सम्बन्ध हैं अनेक बीमारियों से।

संतुलित व उचित आहार है स्वास्थ्य व सफलता की सीढ़ी,

अति होती है हर चीज़ की दुखदायी

पिज़्ज़ा, बर्गर व चीनी से बर्बाद हो रही है वर्तमान पीढ़ी।

है पूरी दिनचर्या उलट-पलट, नहीं है वर्जिश व मुद्रा पर कोई ध्यान,

धूम्रपान, सुरा सेवन व आलस्य है कई रोगों की खान।

डर, चिंता, क्रोध, ईर्ष्या, व स्वार्थपरता से पनपते कई रोग,

इस सोच से बढ़ रहे हैं बेशुमार मनोरोग।

संतुलन कायम रखना जरुरी है मन व मस्तिष्क का,

दिल में रखना शांति व सेवा भाव,

योग, प्राणायाम व ध्यान जरूर करना ईश का

तैयारी रखना भविष्य की पर भय मत पालना आने वाले कल का

डर तो तुरंत मारता इंतजार नहीं करता एक पल का।

मत फंसना गलत संगत में, अच्छे दोस्तों के संपर्क में रहना होगा हितकारी,

प्रकृति का लुत्फ़ उठाना, इससे जुड़ाव स्वास्थ्य के लिए हैं गुणकारी

नींद की कमी जरूर करती है जिंदगी अधूरी,

सुस्ताना, आराम भी करना, मनोरंजन भी है जरुरी।

समस्त सावधानियों के बावजूद

कोई न कोई बीमारी आती है मानव जीवन में,

कर देती है धराशायी बड़े-बड़ों को पल भर में।

दुर्घटना व महामारी पर बस नहीं किसी का,

बीमारियों ने घेरे थे संत तुलसी, रामकृष्ण परमहंस व विवेकानन्द,

लेकिन उन्होंने नहीं छोड़ा था अंतिम क्षणों तक उठाना जीवन का आनंद।

स्वास्थ्य बीमा व कुछ सुरक्षित रखी हुयी पूँजी ही

कारगर उपाय है इस आपदा का,

सकारात्मकता व सतर्कता से सामना करना आपातकाल का

जो भी हो उसे स्वीकारना, खेल समझकर नियति का।

सेवानिवृति के बाद हाथ पर हाथ धर मत बैठना,

बेसहारों की मदद से मिलेगा बेहद सुकून

व्यस्त रहना, मस्त रहना, अपनी पसंद के कार्य करते रहना।

स्वस्थ हो तो भी वर्ष में एक बार हेल्थ चेकअप है जरुरी,

वरना रह जायेगी आपकी अनेकों इच्छाएं अधूरी।

ले. जनरल (डॉ.) शिवराम मेहता (रिटायर्ड)