रंग फीके हो सकते हैं, पर रखना इन्हें हर्षित,
परवाह मत करना, हो सकता है बहुत कुछ दूषित।
कमजोर हुई है, मिटी नहीं है महामारी,
डरा रही है महँगाई, ले रहे हैं युद्ध विकराल रूप
पर जरूर खेलना प्यार की होली अबकी बारी।
हो विप्पति भयंकर तो भी मत होने देना कम उल्लास मन का
आशा के रंगों का उत्सव है यह, मंगल हो होलिका।
खेलना मस्त होकर होली, गुलाल रंग चाहो तो कम रखना,
खुशियां, कुछ धन, प्यार व सद्विचार जरूर बांटना,
बेसहारों, बेचारों व भाई बंधुओं पर भी ध्यान देना
धर्म व जाति का भेद-भाव भूलकर, हरेक के साथ होली खेलना
यही है होली व हर उत्सव की सीख
हर पल की रगो में रंग भरना
उद्देश्य होली का एक ही हो खुश होकर ख़ुशी बांटना
कोई कुछ कष्ट दे तो भी माफ़ करना
होली है प्यारों, बुरा मत मानना।
प्रहलाद बनकर तपना दया, प्रेम, सच्चाई व परिश्रम की अग्नि में,
गिले-शिकवे का गुलाल उड़ाना, अवगुणो की आहुति देकर
कुछ भी हो ज्वलित रखना मस्ती का खुमार इस होली में
बजाना चंग, ढोल, मृदंग, मंजीरे
भर लेना खुशियों की तरंगे पिचकारी में,
संस्कारों को जीवंत रखना रंगों की फुहारों में।
कोशिश करना दुश्मनों को मनाने की, लगाकर प्राकृतिक गुलाल,
रंग ना उड़े किसी चेहरे का, लगा देना मोहब्बत के रंग,
गले मिलना मास्क के संग, लगा देना सबके गालों पर गुलाल।
समस्त नफरतों की आहुति देकर कर देना चमत्कार,
जले होली पर हर बुराई, स्वाहा हो भ्रष्टाचार।
ले. जनरल (डॉ.) शिवराम मेहता (रिटायर्ड)
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