(यह आपको भीतर से खोखला कर देगी)

ईर्ष्या की भावनाओं से तो बिगड़ जाएगा सब कुछ आपका,

यह मजबूर कर देगी आपको घुट-घुट कर जीने को

ईर्ष्या से बचोगे तो सुधरेगा वर्तमान व भविष्य आपका

ईर्ष्यालु बन जाते हैं निंदक व झगड़ालू

बिगाड़ लेते हैं संतुलन अपनी मानसिक शांति का

ईर्ष्या है लालच का ही एक रूप, लालची कहाँ रह पाता है संतुष्ट

ईर्ष्यालु करते हैं अपना समय बर्बाद व नुकसान तन-मन का

नहीं होती है इन्हें शांति व सड़ जाती है इनकी सारी हड्डियां (1)

ईर्ष्या से होते हैं युद्ध, ज्वलंत उदाहरण है महाभारत का।

तृष्णा व गलत कामनाएं है ईर्ष्या की जड़ें, उन्हें मत पालना,

ईर्ष्या से बचना है तो सफल लोगों की दिल से प्रशंसा करना

शान्ति मिलेगी जब आपसे उन्नत और बेहतर लोगों से सीख लोगे

अगर है कोई अभाव तो उसकी पूर्ती रचनात्मक तरीके से करना

मत जलना दूसरों की उपलब्धियों से, बनाना उन्हें प्रेरणा के स्रोत

सब कुछ भगवान करता है यह सोचकर सदैव खुश रहना ।

इस भाव व सकारात्मकता से मिटेंगे मष्तिष्क के सारे द्वन्द,

रहेंगे आपके विचार, तन-मन व आत्मा सदैव शुद्ध ।

सन्दर्भ
(1) पवित्र बाइबिल, निति वचन 14:30
शांत मन, तन का जीवन है परन्तु मन के जलने से हड्डियां भी जल जाती है ।

लेखक – लेफ्टिनेंट जनरल (डॉक्टर) शिवराम मेहता, सेवानिवृत