(सम्मान व सेवा सदैव करते रहें)

ईश्वर के साक्षात रूप होते हैं माता-पिता व शिक्षक,

इनकी सेवा-सुश्रुषा जरूर करते रहना आजीवन

पाते रहना इनका आशीर्वाद ताकि कभी नहीं बनो भिक्षुक ।

जो कुछ हासिल किया है व करोगे, होगा उन्हीं की बदौलत,

अच्छा दोस्त व जीवन साथी भी होता है गुरु का ही रूप

गुणीजनों का साथ व आध्यात्मिक गुरु ही है सबसे बड़ी दौलत ।

आध्यात्मिक गुरु सोच समझकर चुनना,

सावधानी से, कलयुगी गुरु से बचते रहना ।

नकली व लालची गुरुओं ने किसी को भी नहीं है बख्शा

वो शिष्यों को क्या बचाएंगे, नहीं कर पाते हैं खुद की भी रक्षा ।

सद्गुरु होते हैं मनुष्य के रूप में नारायण,

शिक्षा गुरु होंगे अनेक पर दीक्षा गुरु बनाना सिर्फ एक

मत रखना कोई शक, कर देना सद्गुरु के समक्ष पूर्ण समर्पण ।

सोच बदलनी होगी जीवन के आखिरी छोर पर,

बना लेना अपने समस्त बच्चों व शिष्यों को अपना मार्गदर्शक

पास पलटेगा, सुखी रहोगे भरोसा करके इन शिक्षकों पर ।

लेखक – लेफ्टिनेंट जनरल (डॉक्टर) शिवराम मेहता, सेवानिवृत