बुनियादी सुविधाओं की कमी से हो रही है गांव की जिंदगी अधूरी

शहरों की ओर पलायन बिगाड़ रहा है दोनों का संतुलन

संजोए रखना होगा दोनों को, दोनों है खास व जरूरी

गांव ही है हमारी संस्कृति, जीवनशैली व परंपरा के मुख्य आधार,

शहर है हमारे आर्थिक विकास और नवाचारों की खास धुरी

गांव हो रहे हैं खाली, वहां नहीं बचा हैं कोई भी रोजगार ।

बढ़ती आबादी, आधुनिकीकरण, बदलता पर्यावरण है मूल कारण,

जल की कमी ने बिगाड़ दिया है हर जगह पूरा समीकरण ।

तुरंत ठोस कदम उठाने होंगे ताकि न बने समस्या और भयंकर,

पर्याप्त जल, अच्छी शिक्षा व स्वास्थ्य सेवा जब मिलेगी गांव में

कम आएंगे गांव वाले शहरों में भटककर

शहरों की हालत तो बहुत बिगड़ी हुई है पहले से ही

नहीं रुकने वाला है पलायन, तैयार करने होंगे नए शहर

सुधारना होगा पुराने शहरों को ताकि ना हो स्थिति बदतर ।

ले रहा है कई लोगों की जान शहरों का बढ़ता हुआ वायु प्रदुषण,

जागरूक होना होगा हमें, सरकारों व समस्त ओहदेदारों को

सुधार करना होगा गांवों व शहरों का ; ताकि ये बने रहे हमारे आभूषण ।

लेखक – लेफ्टिनेंट जनरल (डॉक्टर) शिवराम मेहता, सेवानिवृत