अतृप्त कामनाएं होती है दुःख की जननी।

रखो इन्हे नियंत्रण में, ये कभी नहीं थी अपनी।।

संसार को नहीं संभल सकोगे, न इसे बदल पाओगे।

बदलो खुद व मन को, दुःख भागेगा

अर्जित कर ज्ञान, बदल ले तेरे भाव

सुख दिल में जागेगा।।

मन हो गया शांत तो भरेगा सुखों से आशियाना।

अशांत मन में ही तो रहता है दुखों का मंडराना।।

गर सकारात्मक हुई व बदला दृष्टिकोण।

तो शान्ति सदैव बानी रहेगी, सारे कष्ट होंगे गौण।।

आपदाएं आएँगी बेशुमार, धैर्य मत खोना।

यही है कारगर उपाय जिससे नहीं पड़ेगा रोना।।

शिक्षा देने वाले भी हैं बेशुमार।

फिर भी दिल बहुत भारी हो तो थोड़ा रो लेना।

रोना अकेले, घर के कोने में,

साहस से उमंग भर लेना उसके बाद।

नयी स्फूर्ति से शुरू करना हर काम,

जरूर होंगे फिर से आबाद।

पर याद रखना, पुराने दर्द, आपके वर्तमान को न करे बर्बाद।।

ले. जनरल (डॉ.) शिवराम मेहता (रिटायर्ड)