Without friends, no one would want to live, even if he had all other goods. — Aristotle

यह रिश्ता हम खुद बनाते हैं बाकी मिलते हैं विरासत में,

मित्र हो बराबर प्रतिष्ठा वाला, दूर रहना दबंग लोगों से,

गलत दोस्त धकेल देते हैं अंधियारे गलियारों में

अच्छा दोस्त ही ताउम्र राह दिखाता है मुसीबतों में

बेहद नाजुक है यह बंधन, अभिमान ना आए कभी भी

जब हिचक ना हो मदद मांगने और देने में

समझ लेना वही असली दोस्त है हर परिस्थिति में।

धन के लेन-देन में सतर्कता बरतना ठीक होगा,

गलती पर तुरंत माफ़ी माँगना वरना रिश्ता टूट जायेगा।

जहां तक हो सके उनके समय का ध्यान जरूर रखना,

बेफिज़ूल की बातों में उनका समय बर्बाद मत करना

दोस्त के स्वभाव व संवेदनशीलता का ध्यान रखना।

सुनना मित्रों के दुखड़े व गोपनीय बातों को तसल्ली से,

मत तोड़ना विश्वास प्रकट करके उनके गुप्त तथ्यों को,

अनमोल हीरा है मित्र सदैव लगाए रखना उसे सीने से।

मित्रता वह खेत है जहां हमें प्रेम बोना है,

यही वह जगह है जहां सदैव प्यार की फसलें काटना है।

फायदा अवश्य होगा कबीर जी की राय याद रखने में,

जो है “निंदक नियरे राखिए” (1)

वर्तमान में बहुत अहमियत है अच्छे दोस्तों की बुढ़ापे में,

नहीं रहा है अब ज़माना संयुक्त परिवारों का,

रहना होगा अधिकांश बुजुर्गों को अब अकेले में,

सुकून हासिल करना दोस्तों से इन नाज़ुक हालातों में।

ताउम्र बनाए रखना अमूल्य दोस्त जीवनसाथी को,

उनकी छोटी-मोटी गलतियों को माफ़ करते रहना

जगह देना उनको अपनी ताकि संभालते रहे वो आपको।

(1) निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय,
बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय।

भावार्थ – जो आपकी निंदा करता है उसे अपने पास जरूर रखिए । निंदक हमारे चरित्र की दुर्बलताओं को बताते रहते हैं जिससे हम अपनी इन कमियों को दूर करके स्वाभाव को निर्मल कर सकते हैं ।

ले. जनरल (डॉ.) शिवराम मेहता (रिटायर्ड)