मानव धोखा खा जाता है पूरी सावधानी के बाद भी,
दुःख असहनीय होता है जब करीबी भी करते हैं विश्वासघात
आप तो सपने में भी नहीं करना अन्याय किसी के साथ भी ।
चालाकों से सावधान रहना ये नहीं देंगे बुरे वक्त में साथ,
ऐसे लोग नहीं करेंगे आपके जज्बातों की कदर
इश्क में भी धोखा होता आया है कई नेक लोगों के साथ
इस मामले में एतबार करना अच्छी तरह सोच समझकर
बेवफा लोग खींच लेते हैं कई बार एन मौके पर अपना हाथ ।
बुजुर्ग अभिभावकों की राय लेना होता है जरूरी ,
इनको होता है सटीक ज्ञान ऐसे मामलों का
कामवासना व जल्दबाजी से हो सकती है जिंदगी कष्टकारी
गड़बड़ होने पर माफ अवश्य करना जो नहीं निभा पाए वादे
शायद रही होगी उनकी भी कोई विशेष मजबूरी
ऐसे हालातो में सीख लेना जख्मों को छुपाने का हुनर
धन के लेन-देन में सावधान रहना होता है बहुत बेहद जरूरी
कितना ही करीबी हो, हो सके तो बचना उधार देने से
वरना हो सकती है आपकी खाली पूरी तिजोरी ।
जितनी हो सके मदद अवश्य करना जरूरतमंदों की,
इससे अवश्य मिलेगी आपको जीवन में शांति
जरूरत पड़ती है जीवन में एक दुसरे को मदद की लेन-देन की ।
लेखक – लेफ्टिनेंट जनरल (डॉक्टर) शिवराम मेहता, सेवानिवृत
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