Patience is our most valuable ornament and super power.
धीरज है सुखी मानव का महानतम आभूषण,
अधीरता से नहीं कोई बड़ा अवगुण ।
अनहोनी व विपत्ति को पार कर लेते हैं धैर्यशाली लोग,
उतावलापन पैदा करता अनेक भयंकर रोग ।
धैर्य की कमी से बिगड़ते जाते है बनते हुए काम,
सब्र व सहनशीलता आपको नहीं होने देगी नाकाम ।
धैर्य हीनता बढ़ाती ईर्ष्या, अस्थिरता व क्रोध,
हो जाता पूरा शरीर, मस्तिष्क व हृदय विचलित,
हमें रहना है हरदम शीत, यही है महान ग्रंथों का अनुरोध ।
जरूर पढ़ना धैर्य की महिमा धम्मपद में,
बुद्ध ने माना है इसे सर्वोत्तम तप,
धीरज की प्रशंसा मिलेगी यहूदी वलमूड में,
इसकी महिमा का गुण-गान है नीति वचनों में ।
शांडिल्य उपनिषद के 10 नियम देते सहनशीलता को प्रमुख स्थान,
गलतियनस में माना इसे आत्मा के फलों की खान ।
मिलेगा वर्णन सब्र का कुरान मजीद में कई जगह,
अर्ज है जरूर मंथन करना,
सब्र की अहमियत नहीं है बेवजह ।
धैर्यवान होता भगवान का रूप,
वही दे पाता है उचित राय व करता हर कार्य हमारे अनुरूप,
उतावलापन बना देता है मानव को शैतान स्वरूप ।
बेसब्री बना देती है अच्छे खासे को दीन-हीन,
कमजोर दिल वाले तो तुरंत होते इसके अधीन ।
कम बोलना, उत्तर देने में मत करना जल्दबाजी,
मुश्किलें बढ़ेगी, कह दिया अगर जल्दी “हां” जी,
धैर्य से सुनना ताकि ना हो कोई पछतावा,
गर बात नहीं आप के बस की तो विनम्रता से जरूर कहना “ना” जी ।
मत करना कोई वादा जल्दबाजी में, हो सकता है आपकी क्षमता से परे,
कह देना प्यार से “ना” ताकि रहोगे शर्मिंदगी से परे ।
मत खोना आपा, बच्चों की बेतुकी हरकतों पर,
तसल्ली से सीख देना, तनाव कम होगा पूरे परिवार पर ।
हर क्षेत्र में जगह देना जो रहते हैं आपके साथ,
हर काम व रिश्ता बिगड़ता बेसब्री से,
ना हो बिना काम की टोका-टोकी, कुछ नहीं आएगा आपके हाथ ।
नौकरी ही नहीं घर वाले भी नहीं रहना चाहते बेसब्रों के साथ ।
बतलाना घरवालों व सहायकों से विनम्रतामय शब्दों में,
होगा माहौल व हर कार्य आनंदमय,
खाना-पीना ठंडे दिमाग से व सुखकर भावों में,
कम होंगे बीमार व न आओगे चिकित्सकों के चक्कर में ।
जरूर बचना हरी (Hurry), वरी (Worry) व करी (Curry) से,
यह तीनों दुश्मन वश में होंगे श्रद्धा व सबूरी से ।
हो जाए बेवजह कोई बेइज्जत आपकी तो भी तटस्थ रहना,
कारण ढूंढना उसके व्यवहार का, अधीर मत होना,
होगा यह मुश्किल पर नहीं है नामुमकिन,
खुद की गलती हो तो सुधार करना,
अन्यथा माफ करना, भूल जाना व आगे बढ़ना ।
जीतोगे खीज व नफरत सिर्फ सहनशीलता से,
हर जीव को प्यार करना, सहना हर धर्म को,
हर धर्मावली को इज्जत देना, तालमेल बिठाना प्यार से ।
जीवन कोई दौड़ नहीं, इसे सरल यात्रा बनाना,
इसके हर मोड़, पड़ाव व पल का आनंद लेना,
इसमें होंगे उतार-चढ़ाव, रफ्तार नियंत्रण करना,
मन, मस्तिष्क में संतुलन व शांति बनाए रखना,
जिसे बदल नहीं सकते उसे स्वीकारना,
जहां तक हो सके सबके साथ सधा हुआ व्यवहार करना,
यही है धैर्य की नींव, आपको और कुछ नहीं करना,
जो गलतियां मैंने की, आप कतई मत करना ।
(1) धम्मपद – 184 (महात्मा बुद्ध) खंती परमं तपो तितिक्खा … बुद्धा
सहनशीलता और क्षमाशीलता परम तप है।
(2) निति वचन (Proverbs) 25:15 – With patience, you can make anyone change their thinking, even a ruler.
(3) शांडिल्य उपनिषद – 10 नियम
(4) बाइबिल – गलतियनस 5 – 22,23
(5) कुरान मजीद 25 -127, ऐ नबी, सब्र से काम किये जाओ – और तुम्हारा यह सब्र अल्लाह ही की तौफीक (मदद) से है।
ले. जनरल (डॉ.) शिवराम मेहता (रिटायर्ड)
Suman choudhary
Excellent 👍