Category: Poem

विवाह

पवित्र है यह बंधन पर मांगता बेहद त्याग दोनों से, नियोजन हो सोच समझकर, जुड़ना सिर्फ बराबर वालों से, हो अगर वैचारिक समानता तो दरकिरनार करना जाती व धर्म, ध्यान रहे स्त्री पुरुष पूर्ण होते हैं आत्मिक मिलन से, नहीं निभेगा यह रिश्ता सिर्फ शारीरिक संबंधों से, मत चुनना साथी विषय वासना के वेग में, […]

Read More

यादें

नहीं रहते हरदम स्वर्णिम पल, आन-बान व शान, सुन्दर कल के पल, प्यारे परिजनों की यादें करेगी परेशान। जिन्होंने थामा था हर विपदा में तुम्हारा हाथ, दिया था असीम, अशर्त प्यार, झेले सारे सुख – दुःख साथ-साथ। मुश्किल होता हैं ऐसे प्रियतम को भूलना पर स्मरण रहे, वो घड़ियाँ वापस नहीं आएँगी जो बितायी थी […]

Read More

वृद्धावस्था

बिरले पहुँचते इस अवस्था में, खुशियाँ मनाना बेशुमार, तैयारी करनी है बचपन से ही, ताकि झेलनी ना पड़े आम बिमारियों की मार। सदा बचना मोटापा, नशा-पत्ता, आलस्य व गलत सोच से, सही खान-पान, वर्जिश जरूर सुधारेगी बुढ़ापा कुछ व्याधियाँ फिर भी आयेंगी, झेलना इन्हे अपनी सकारात्मक सोच से। सही रखना दिनचर्या, मत भूलना घूमना, ध्यान […]

Read More

स्पर्श

छुये मेरे हाथ हरदम ईश के पावन चरणों को, झुके मेरा शीश सदैव माता-पिता, गुरुजन व बुजुर्गों के लिए करुणामय स्पर्श से मिलती है सांत्वना दुखी दिलों को माँ का स्पर्श देता है जीवन कुम्हलाए शिशुओं को। मत लेना व देना संक्रमण छूकर गन्दी जगह व गंदे हाथों से, करते रहना साफ़ करकमलों को अच्छे […]

Read More

जन्मोत्सव (लड़का – लड़की) (मत भूलना नारी का योगदान)

मेहरबान हुई प्रकृति ईश्वर का उपहार मिला जन्म हुआ, अहम् उत्सव, घर वालों को शकुन मिला। ज्योतिषी ने फ़रमाया, लड़का नहीं जन्मा शुभ मुहूर्त में. बहुत हुई पूजा, दान-दक्षिणा, मचा बहुत हंगामा बच्चा बना खगोल यात्री, उड़ता पूरे ब्रह्माण्ड में पडोसी के बच्चों का जन्म बताया शुभ मुहूर्त में वह बन गया डॉन, रहता ज्यादा […]

Read More

दुःख

अतृप्त कामनाएं होती है दुःख की जननी। रखो इन्हे नियंत्रण में, ये कभी नहीं थी अपनी।। संसार को नहीं संभल सकोगे, न इसे बदल पाओगे। बदलो खुद व मन को, दुःख भागेगा अर्जित कर ज्ञान, बदल ले तेरे भाव सुख दिल में जागेगा।। मन हो गया शांत तो भरेगा सुखों से आशियाना। अशांत मन में […]

Read More

बचना है धर्मों की गफलत से

सब धर्मों को समझा व जीया बहुत करीब से। हर धर्म का मर्म है बेहद पावन सबका आदर करता रहूँगा तहे दिल से।। अफ़सोस! बनाया कई नासमझों ने सिर्फ अपने फायदे के लिए इसे तेज धार वाला हथियार। झगडे-फसाद करने को वे रहते हैं हरदम तैयार।। तरकीबें सोचते हैं मानवों को आपस में बांटने के […]

Read More

समर्पण / वंदना

ईश वंदना से शुरू करता हूँ यह लेख। उसके आशीर्वाद के बिना नहीं होता कोई कार्य कई बार आजमाकर लिया यह देख। लिख रहा हूँ यह कथा मेरे लिए कुछ अनुभव होंगे आपके लिए टूटी – फूटी भाषा में यह सब सम्पर्पित प्रभु और आपको आप भी मेरे प्रभु, प्रभु हम सबका, अच्छा नहीं लगे […]

Read More

देखा ईश्वर को रूबरू

जननी नहीं वह ईश्वर ही था जो समेटता खिलता था अपनी गोद में। शर्तिया है वह हर माँ के आँचल की ओट में नौ महीने भी था मैं सुरक्षित उसके महान मंदिर में उससे भव्य नहीं कोई देवालय पूरे जहाँ में।। वो ही तो थी आमना, मरियम, कौशल्या व देवकी। पूजते रहो माई को, होती […]

Read More

Page 9 of 9

© shivrammehta.in 2026. All Rights Reserved.