घर का माहौल रखें प्रेममय व करुणा से ओत-प्रोत,

ताकि बने हम सब का जीवन पूरा आनंद का स्रोत।

घर का परिवेश ही है परम विद्यालय,

हर पीढ़ी के लिए न था न होगा इससे महान आलय।

परम व पहली गुरु है माँ, फिर आता बापू का नंबर,

ध्यान रहे यह परम सत्य

वरना आपके बच्चे ही ले लेंगे हम सबकी खबर।

बच्चे बहुत कुछ सीखते हैं, अभिभावकों के आचरण से,

क्या उम्मीद रखेंगे झगड़ालू व अनैतिक अपनी अपनी संतानें

वर्तमान में घर का माहौल बन गया है मुख्य धुरी

हर कोई है घर में, एक छत के नीचे

प्रत्येक सदस्य चाहता, अपनी सब कामनाएं करनी पूरी

सेवा, प्यार, व भाईचारा की शिक्षा है जीवन का असली मर्म,

सिखा देना सब धर्मों की इज़्ज़त करना

इससे बड़ा न कोई धर्म है न कोई सत्कर्म।

जरूर रखना अपने ईश को सिर्फ अपने घर के कोने में।

बाहर सब बराबर है, मत रहना किसी अँधेरे में।

जरुरी नहीं संतानें मानें आपका हर आदेश,

हो सकता है अनुपयुक्त, घिसा-पिटा आपका उपदेश

गुस्से में मत कर देना जारी कोई अध्यादेश।

सुनना, होती है उनकी भी कुछ अभिलाषाएं,

आसान नहीं यह काम, लेते रहना विशेषज्ञों की राय

समय-समय पर जरूर आंकना बच्चों की व खुद की समस्त क्षमताएं।

अगर चुके कहीं भी, जरूर होगा पछतावा आपको,

अभी-अभी कानून आया है कुछ देशों में

बच्चों की गलती की सजा, देने को माँ-बाप को,

शर्तिया मानो, हमारी सरकारें भी नहीं चुकेंगी

जरूर कर देगी कठघरे में खड़ा आपको।

ले. जनरल (डॉ.) शिवराम मेहता (रिटायर्ड)