जीवन का सबसे नकारात्मक पहलू है अहंकार,
स्वयं को ज्ञानी मानने वाले का अवश्य होता है पतन
अहंकारी नहीं कर पाता है अपनी आलोचना स्वीकार ।
घमंडी जुड़ा रहता है अपनी बेतुकी झूठी जिद पर,
गुरूर वाले होते हैं बेहद जिद्दी, नहीं सुनते हैं सही राय
इसी वजह से नहीं पहुंच पाते हैं वे बुलंदियों पर
यह लोग तो इतराते हैं अपनी झूठी प्रशंसा पर ।
इनमें नहीं होता है धैर्य, नहीं रह पाते हैं शांत,
भूल जाते हैं अपना पुराना वक्त और अपनी विरासत ऐसे लोगों के वजूद को खत्म होते देर नहीं लगती
नहीं फर्क करते हैं सही-गलत में, भूले रहते हैं अपनी औकात।
कमतर आकंते हैं दूसरों को,रहते हैं अपनी अकड़ में,
करते रहते हैं दूसरों की बुराई जो है ओछेपन की निशानी
नहीं करते हैं विश्वास सरल और सही चितंन में।
करते हैं विनाश अपना व परिवार का होकर अधर्मी,
घमंड नहीं सीखने देता है उनको कुछ भी अच्छा व नया
शर्मसार करते हैं ऐसे लोग इंसानियत को होकर कुकर्मी ।
लेखक – लेफ्टिनेंट जनरल (डॉक्टर) शिवराम मेहता, सेवानिवृत
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