स्वस्थ, आत्मिक यौन अभिव्यक्ति
स्वाभाविक पहलु है सफल जीवन का,
शारीरिक ही नहीं मानसिक तौर पर भी है इसकी अहम भूमिका।
छुपा है इसमें पति-पत्नी व समस्त परिवार की खुशहाली का रहस्य,
इसके बिना रह सकता है अधूरा हमारा जीवन
साधू-संतों की बात अलग है, यह है उनका निर्णय
हाँ, 20 -25 वर्ष तक बृह्मचार्य का पालन करना अवश्य।
इसके बाद ही होता है दो आत्माओं का मधुर प्रणय लाभदायक,
सहज रूप से जारी रखना यह प्रेममय मिलन आखिरी पड़ाव तक।
होता इससे तनाव कम, सुधरती याददाश्त, बनता पूरा शरीर मजबूत,
रिलीज़ होता एंडोर्फिन हॉर्मोन – सुधरता रोग प्रतिरोधक शक्ति
तनाव व अवसाद से भी बचोगे, इन सबके हैं वैज्ञानिक सबूत।
सुअवसर का आलिंगन भी देता बेहद सांत्वना,
दुःख के क्षणों में निशब्द गले लगाना, रहता याद जीवन भर
इस जादू की झप्पी का महत्व कम मत आंकना
पनपेंगे छोटे-मोटे मतभेद, उनका हल ढूँढना
परिस्थितियों के अनुसार प्यार व भरोसे से समझौते करते रेहना।
प्रणय सीमित हो सिर्फ और सिर्फ अपने जीवन साथी तक,
यही एक उपाय है सुखद जीवन का अंतिम साँसों तक।
बिना आत्मिक प्रेम यह गतिविधि है मात्रा वासन,
जो हमेशा साबित होगी बेहद कष्टदायक कामना।
भूलकर भी मत होना कामुकता के अधीन,
यह तो हर हालत में कर देगी आपको दीन-हीन।
आपने देखे होंगे अनेक पथभरष्ट पछताते हुए
जो नहीं रख पाए कामेच्छा को सीमित,
इसके दुष्प्रभाव होंगे अति कष्टदायक व अनगिनत।
दुराचार रोग है भयंकर
सही शिक्षा व मन पर काबू ही है इसका इलाज़,
लेलो यह सीख तुरंत वरना पड़ेगी पूरे परिवार पर भीषण गाज।
यौन अपराध धकेलते अँधियारों में, ले लेते हैं कइयों की जान,
रहना इनसे दूर अगर रखना है खुद व परिवार का मान-सम्मान।
ले. जनरल (डॉ.) शिवराम मेहता (रिटायर्ड)
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