जीवन डगर में घाव लगेंगे गहरे और तीखे,
मिलेंगे घावों पर नमक छिड़कने वाले भी बहुतेरे
बदलना अपनी राह पर जख्मों से कुछ न कुछ तो जरूर सीखें ।
भरोसा रखना घाव कभी न कभी तो भरेंगे,
मत बनने देना घावों को नासूर वरना देंगे यह पीड़ा जीवन भर
जिन्होंने आप पर जुल्म ढाए, सावधान वे तो ऐसा आगे भी करेंगे
मत करना बखान अपने कष्टों का हर एक के सामने
सुनने वाले बहुत मिलेंगे, असली मर्म जानने वाले कम ही होंगे ।
जहां तक हो सके अपनी ताड़ना को दिल में छुपाए रखना
जहाॅं भरा पड़ा है यातनाओं से, इनके आगे हमें नहीं हारना
मत पालना नफरत उनके खिलाफ जिन्होंने आपको दिए हैं दुःख
नजरअंदाज करना घाव देने वालों को
घृणा भरे दिल में नहीं रह पाता है प्रभु
घृणा से ग्रसित मन में न होती है शांति न मिलता है सुख
लेखक – लेफ्टिनेंट जनरल (डॉक्टर) शिवराम मेहता, सेवानिवृत
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