दो ही है इस धरा पर आपके परम और निकटतम मित्र,

एक हैं आप स्वयं और दूसरा है आपका जीवन साथी

यह दो पहिए वाली गाड़ी है हमारी जिंदगी का महान यंत्र ।

नहीं रुकेगी गाड़ी अगर दोनों सारथी हैं सक्षम और स्वस्थ,

हर कोशिश करना ताकि रहे आपका तन और मन तंदुरुस्त

रखना सोच सकारात्मक, बनाए रखना वातावरण प्रेममय

यही एक तरकीब है जिससे नहीं होगा कोई भी पूर्जा ग्रस्त

मानव खुद ही जिम्मेदार होता है अपनी दुर्गति या प्रगति का (1)

अपना लोगे दुर्गुण तो जीवन का सूर्य जल्दी ही हो जाएगा अस्त ।

त्यागना राग-द्वेष, काम-क्रोध, भोग, आलस्य व पापाचार,

कर लेना अपना शरीर, इंद्रियां व मन आपके वश में

ताकि बन सको खुद के श्रेष्ठ मित्र और हो आपका उद्धार ।

स्वस्थ जीवन के स्तंभ है सही खान-पान, वर्जिश और ध्यान,

अपनाना वो आदतें जिनसे रह सको तरोताजा और शांत

चार चांद लग जाएंगे जब ले लोगे प्रेम शक्ति का योगदान

कठिनाइयां अनगनित आएँगी पर रहना हमेशा पॉज़िटिव

हरदम रखना जीवन साथी व कुटुंब वालों का मान

निश्छलता के भाव का कभी भी ना हो अभाव

निष्कपट लोगों को अवश्य मिलता है प्रभु का वरदान

इसी से बना रहेगा सुन्दर उपवन आपका खानदान ।

सन्दर्भ

  1. उध्दरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत ।
    आत्मैव ह्यात्मनो बंधुरात्मैव रिपुरात्मन: ।।
    गीता, 6 – 5
    भावार्थ – अपने द्वारा अपना संसार- समुद्र से उद्धार करें और अपने को अधोगति में न डाले ,क्योंकि यह मनुष्य आप ही तो अपना मित्र है और आप ही अपना शत्रु है ।

ले. जनरल (डॉ.) शिवराम मेहता (रिटायर्ड)