अश्रु बहेंगे बेशुमार, जीवन पथ के कई मोड़ों में,

रोकना होगा मुश्किल, झेलना अधिकतर अकेले मे ।

कोई नहीं बांटेगा उस पीड़ा को जिसने तुम्हें रुलाया,

ध्यान करो कई कष्टों को तो आपने ही है बुलाया ।

संभलो, जीतलो, जियो हर दुख को मुस्कान से,

याद रखें, दर्द कम नहीं होते हरेक के समक्ष रोने से ।

क्रुध्द मन वाले आंसुओं को चुपके से पी जाना,

हो सके तो पीड़ा का सकारात्मक पक्ष जरूर देखना

दुख वाले नीर को खुशी के आंसूओं में बदल लेना

बहने देना इनको ताकि तनाव कम हो मन में

घड़ियाली आंसू बहाने वालों से सावधान रहना ।

लेखक – लेफ्टिनेंट जनरल (डॉक्टर) शिवराम मेहता, सेवानिवृत