हमारा वर्तमान व भविष्य सिर्फ हमारे चरित्र और कड़ी मेहनत पर निर्भर करता है ।
अभिभावकों सुधारलो अपना चरित्र, संताने होगी भाग्यवान,
माता-पिता को ख़ुशी होती है जब बच्चे होते हैं चरित्रवान
गुरुजनों से करबध्द अरदास है कृपया रहे सचेत व सावधान
आपके ही जिम्मे है भावी पीढ़ी और पूरे विश्व का भविष्य
कम होंगे झगड़े – फसाद अगर मानव हो चरित्रवान ।
हर्ज नहीं अगर कहूं, याद दिलाऊॅं ,क्या है सही चरित्र,
जानकारी मिल जाएगी आपको हर धर्म ग्रंथ में
अपनाना देवीसंपदा के गुण, हो जाओगे हर प्रकार से पवित्र
गीता का 16 अध्याय जरूर पढ़ना अगर सुधारना है चरित्र (1)
यहाॅं वर्णित हैं अहिंसा ,सत्य ,अक्रोध ,त्याग , क्षमा व पवित्रता
पवित्र बाइबिल में भी विवरण है कैसे निर्माण करें चरित्र
इसमें खास हिदायत है बुरी सांगत से दूर रहने की
ताकि रख सको अपना चरित्र सदैव पवित्र (2)
अल्लाह को प्रिय होते हैं जो नहीं होते हैं मुनाफिक ( 3)
पैगंबर मोहम्मद प्यार करते थे उन्हें जिनका अच्छा था चरित्र ।
हिदायतें हैं शिष्टता, उदारता, साहस, क्षमा व सहनशीलता पर,
कुरान में शिक्षा है हर परिस्थिति में चरित्रवान रहने की (4)
पतंजलि के योग सूत्रों में हैं चरित्र निर्माण के यम तथा नियम (5)
मानव की महानता धन में नहीं , निर्भर होती है उसके चरित्र पर
चरित्रहीन संपन्न मानव अक्सर बन जाते हैं बेहद बर्बर
वर्तमान में हमारी सार्वभौमिक आवश्यकता है चरित्र निर्माण की
वरना धकेल देंगे दुश्चरित्र मानव विश्व को विनाश की कगार पर ।
चरित्रवान बनने के लिए करने होंगे दीर्घ और धैर्यपूर्ण प्रयास,
आत्मनुशासन व आत्मसंयम से होता है चरित्र का विकास
तोड़ पाओगे कठिनाइयों की संगीन दीवारें सच्चे चरित्र के सहारे
अस्त- व्यस्त व अनियमित जीवन से होता है चरित्र का नाश ।
सत्य है चरित्र की नीव, करना इसे दृढ़ता से स्थापित,
करना होगा स्वयं को अनुशासित, सुसंगठित व व्यवस्थित ।
चरित्र का निर्माण होगा उज्ज्वल और महान विचारों से,
चरित्र और शुद्ध अंतःकरण ही हैं सुखी जीवन के मूल स्रोत
अधिकतर दुःख उत्पन्न होते हैं चरित्र में आये दोषों से
जरूर सुधरेगा आपका वर्तमान व भविष्य चरित्र की ताकत से स्मरण रहे ,
आप खुद ही हैं अपने भाग्य के निर्माता (6)
मानव की सफलता और शांति स्थाई रहती है चरित्रवान होने से ।
संदर्भ–
1. श्रीमद्भागवत गीता -16,1-2
2. पवित्र बाइबल -कुरिन्थियो, 15 -33(धोखा नहीं खाना, बुरी संगति अच्छे चरित्र को बिगाड़ देती है)।
3. मुनाफिक उन्हें कहा जाता है जो दोहरा चरित्र वाले होते हैं यानी जो मुंह पर कुछ और पीठ पीछे कुछ और रखते हैं ।
4. कुरआन मजीद- सूरा अल – कलम 68:4
5. योगसूत्र, आचार्य पतंजलि – 2/30-32
अहिंसा -सत्यास्तेय ब्रह्मचर्यापरिग्रहा यमा:।
(हिंसा न करना, सत्य ,चोरी न करना ,ब्रह्मचर्य और संग्रह का अभाव – ये यम कहलाते हैं । आंतरिक तथा बाह्य शुद्धि, संतोष, तपस्या ,शस्त्रपाठ और ईश्वरोपासना – ये नियम है ।
6. A Man’s own character is the arbiter of his fortune. – SYRUS
(मनुष्य का अपना चरित्र ही उसके भाग्य का निर्णायक होता है)
लेखक – लेफ्टिनेंट जनरल (डॉक्टर) शिवराम मेहता, सेवानिवृत
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