(राजनेताओं के हर गलत कार्य / कुकर्मों की सजा जनता को भी भोगनी पड़ती है, कृपया सही चरित्र वाला नेता ही चुनें)
राजनीति होती है हमारे जीवन के नाप-तोल का उपकरण
इससे दूर रहकर समाज में जीना मुश्किल होगा,
राजनीति के अस्त्र-शस्त्र होते हैं बहुत ताकतवर
हथिया लिया इन्हें गलत लोगों ने तो बहुत कुछ बर्बाद होगा ।
गलत आदमियों को चुनकर मत दे देना अपने गले का फंदा उनके हाथों में,
यह गलत नेता, राजा, महाराजा, करवा रहे है हिंसा व कई तरह के युद्ध
दिखाते है जनता को झूठे सपने और रख रहे हैं काल्पनिक दुनिया में
करते है यह मासूम जनता की खरीद-फरोख्त भेड़-बकरियों / जानवरों की तरह
बिक जाते हैं भोली जनता के आदर्श कौड़ियों के भाव में ।
विडंबना देखो हम ही बना रहे हैं इन सरफिरों को राजनीति का सिरमौर,
हरा देते हैं अच्छे व्यक्तियों को व करवाते हैं हमारा पतन चारों और ।
राजनीति के हर स्तर पर दिख रही है मूल्यहीनता,
भोग रही है अनेक तरह की पीड़ा समस्त जनता ।
वर्तमान की राजनीति में समा गई है अनेक बुराइयां
इसने बाँट दिए है इंसानो को धर्म, जाति और पथ के टुकड़ों में,
अछूता नहीं है हमारा देश, इसमें भी आ गई है अनेक खामियां
हम बैठे है ज्वालामुखी के मुहाने पर, देर नहीं लगेगी राख के ढेर होने में ।
ऐसी हालत में कहाँ जरुरत है किसी दूसरे देश के आक्रमण की,
हमने तो नींव डाल दी है हमारी हर तरह की बर्बादी की
खुलेआम धज्जियाँ उड़ा रहे हैं विश्व के सर्वश्रेष्ठ हमारे संविधान की
कहीं भी पालना नहीं हो रही है समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक भावनाओं की ।
भूल गए है सब प्रतिज्ञाएं जो ली थी गणतंत्र दिवस पर हमने
जब हमारा संविधान लागू हुआ था 26 जनवरी 1950 को,
दरकिरनार कर दिया है समानता, धार्मिक और स्वतंत्रता के अधिकारों को
कोई बात नहीं करता बराबर का दर्जा देने को हरेक को
राजनीति से जुड़ने की अनुमति मिल रही है भ्रष्ट, अपराधी व बेईमानों को
बेबस है चुनाव आयोग, शायद सांप सूंघ गया है उसको ।
अब हम सबको “चलता है” की भावना से दूर होना होगा
सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ बोलना हो गया है जरुरी
सरकार के कामकाज से बेफिक्र रहना महंगा पड़ेगा
इस सोच से तो जरूर ही नासमझ लोगों का ही राज़ होगा (1)
समय कठिन है, हर धर्मावली को कट्टर नहीं उदार बनना होगा
रखिये अपने धर्म को अपने तक ही सीमित, किसी और पर थोपना नहीं
जाती, रंग, नस्ल, धर्म व भाषा के आधार पर भेदभाव को रोकना होगा
राजनेताओं के कुकर्मों की सजा भोगती आई है उनकी प्रजा
तत्काल सुधार करना है वरना महाविनाश अवश्य होगा ।
जैसे ही आप सही बात कहेंगे, आपको घोषित किया जाएगा देशद्रोही व आतंकवादी
हर कोशिश होगी ताकि कर सके आपकी कई तरह की बर्बादी ।
अडिग रहना, चलते रहना सत्य के कर्म पथ पर,
राह बहुत कठिन है पर जुड़ेंगे कई सही लोग आपके डगर पर
अंजाम कुछ भी हो, एक बात जरूर है
कई पीढ़ियों तक गुणगान होता रहेगा आपके सद्कर्मों पर ।
सन्दर्भ –
- सरकारों पर भी नजर रखना जरूरी है । हमें खुद को बदलना होगा । प्लेटो कहते थे अगर हम अपनी सरकार के कामकाज से बेफिक्र हैं तो नासमझ हमेशा हम पर शासन करते रहेंगे ।
लेखक – लेफ्टिनेंट जनरल (डॉक्टर) शिवराम मेहता, सेवानिवृत
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