सब धर्मों को समझा व जीया बहुत करीब से।

हर धर्म का मर्म है बेहद पावन

सबका आदर करता रहूँगा तहे दिल से।।

अफ़सोस! बनाया कई नासमझों ने सिर्फ अपने फायदे के लिए

इसे तेज धार वाला हथियार।

झगडे-फसाद करने को वे रहते हैं हरदम तैयार।।

तरकीबें सोचते हैं मानवों को आपस में बांटने के लिए।

जबकि बनना था धर्म को इसे सिर्फ मदद व भाईचारा के लिए।

कुछ न कुछ गलत हो रहा है कई धर्मों के नाम पर

कुछ अफसर व राजनेता भी कर रहे हैं अक्षम्य अपराध

व चालाकियां धर्म के नाम पर।

सबसे गंभीर चोट है, यह पूरे विश्व समाज पर।।

अर्ज है उखाड़ फेंको इन दुष्टों को जड़-मूल से।

ऐसी सजा दो की वे कभी आँख ना मिला सके किसी से।।

हक़ नहीं है अपरिपक्व व अधर्मियों को कुर्सी पर बैठने का।

वे क्या भला करेंगे हमारा व विश्व का।।

घृणा, हिंसा व अन्याय नहीं सिखाता कोई मजहब।

बहुत हो गया खून-खराबा तत्काल सुधरो अब।।

पूजा-पाठ हो दिल/घर के कोने में, मिलेगी असली शांति

अर्ज है अब तुरंत हो यह बदलाव की क्रांति।।

दिखावा से बड़ा अधर्म नहीं।

अज्ञानी कहे उनका ही धर्म सर्वोपरि

इससे बड़ी भूल नहीं।।

भटका रहे अपरिपक्व पंडित, पादरी व मौलवी

इनसे नासमझ व खतरनाक और कोई जीव नहीं।।

दूर रहना इनसे, यह बनाते भोलों को खलनायक।

कभी न बनना इनके अनुयायी, ये नहीं शक्ल देखने लायक।।

जो हृदय है करुणा व प्रेम विहीन

उसमें धर्म व प्रभु का आवास नहीं रहा आज तक।

महान धर्म प्रचारक सिखाते सिर्फ मनुष्यता

मानवता ही धर्म मानों, भलाई करो अंतिम साँसों तक।।

जो जिस धर्म को माने पूरी आजादी देना उसको।

याद रखना नहीं पहना सकोगे एक ही नाम का चौला हरेक को।।

ध्यान रहे अर्चना के रास्ते होंगे अनेक,

पर पहुँचती है हर अरदास सिर्फ उसी एक को।।

बेझिझक विरोध करना है

गलत धार्मिक सोच व बेतुके रीती रिवाजों का।

कभी भी प्रोत्साहित मत करना उनको

जो समर्थन करते धर्म परिवर्तन का।।

नकार दो गलत राजनेताओं को,

जिनका मकसद है वोट की राजनीती।

कह दो साफ़ शब्दों में इन पाखंडियों को

अब नहीं चलने देंगे बिखराव की उनकी रणनीति।

बहुत चतुराई से यह सब बनाते हैं

गरीबों व नासमझों को खलनायक।

कर्त्तव्यपरायणता, ईमानदारी, दया, भाईचारा ही धर्म की जड़े हैं।

जो इनसे दूर, वे मानवता के घोर दुश्मन, उनसे भूल कर भी न जुड़ें।

सतर्क रहो ताकि कभी भी पछताना ना पड़े।।

ले. जनरल (डॉ.) शिवराम मेहता (रिटायर्ड)